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स्कूलों में धार्मिक गतिविधियां थोपने के आदेश का भीम आर्मी विरोध

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ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोंडागांव। कोंडागांव, भीम आर्मी भारत एकता मिशन, छत्तीसगढ़ की जिला इकाई ने स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी कथित निर्देशों पर आपत्ति जताते हुए सरकारी विद्यालयों में किसी भी विशेष धर्म से जुड़ी गतिविधियों को अनिवार्य किए जाने का विरोध किया है। संगठन ने इसे संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के विपरीत बताते हुए सरकार से पुनर्विचार की मांग की है।

धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का हवाला

भीम आर्मी भारत एकता मिशन के जिला प्रवक्ता पी. एल. विश्वकर्मा ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, जहां संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने या किसी भी धर्म को न मानने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। ऐसे में सरकारी संस्थानों में किसी विशेष धर्म से संबंधित गतिविधियों को अनिवार्य बनाना उचित नहीं माना जा सकता।

विद्यार्थियों की धार्मिक स्वतंत्रता पर चिंता

उन्होंने कहा कि यदि सरकारी विद्यालयों में किसी विशेष धर्म से जुड़े मंत्र, प्रार्थना या धार्मिक गतिविधियों को सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य किया जाता है, तो इससे अन्य धर्मों और समुदायों के विद्यार्थियों की धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। सरकार को ऐसे कदमों से बचना चाहिए, जिनसे किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे।

राष्ट्रीय गतिविधियों को प्राथमिकता देने की मांग

पी. एल. विश्वकर्मा ने सुझाव दिया कि सरकारी विद्यालयों में राष्ट्रीय गान, राष्ट्रीय गीत और संविधानसम्मत एवं सर्वस्वीकार्य गतिविधियों का ही संचालन किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे सभी धर्मों और समुदायों के विद्यार्थी समान रूप से सम्मान और सहभागिता का अनुभव कर सकेंगे।

सरकार से निर्देश वापस लेने की मांग

भीम आर्मी भारत एकता मिशन ने छत्तीसगढ़ सरकार से मांग की है कि यदि जारी निर्देशों से किसी विशेष धार्मिक गतिविधि को अनिवार्य किए जाने का आशय निकलता है, तो ऐसे निर्देशों पर पुनर्विचार किया जाए। संगठन ने विद्यालयों में संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के अनुरूप वातावरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

संविधानसम्मत शिक्षा व्यवस्था की वकालत

संगठन का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में ऐसा माहौल होना चाहिए जहां सभी विद्यार्थी बिना किसी धार्मिक भेदभाव के शिक्षा प्राप्त कर सकें और संविधान में निहित समानता, स्वतंत्रता एवं धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों को बढ़ावा मिले।

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