Buy Advt. Space

बीसी सखी संतोषी सिन्हा ने गांव में डिजिटल बदलाव लाया

By

ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोंडागांव । जिले के केशकाल विकासखंड अंतर्गत इरागांव की निवासी श्रीमती संतोषी सिन्हा आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। उन्होंने अपने आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर न सिर्फ खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि गांव और आसपास के क्षेत्रों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़कर आर्थिक सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश की है।

बीसी सखी के रूप में शुरुआत, चुनौतियों से मुकाबला

संतोषी सिन्हा ने वर्ष 2018 में बीसी सखी के रूप में अपने कार्य की शुरुआत की। वे “सीता सावित्री स्व-सहायता समूह” से जुड़ी हैं और सीएससी के माध्यम से ग्रामीणों को सेवाएं दे रही हैं। शुरुआती दौर में संसाधनों की कमी और जागरूकता का अभाव बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने धैर्य और दृढ़ संकल्प से इन मुश्किलों को पार किया।

हजारों लोगों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा

संतोषी अब तक 3500 से अधिक बैंक खाते खुलवा चुकी हैं और करीब 25 हजार से ज्यादा लेन-देन कर चुकी हैं, जिनकी कुल राशि 3.5 करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने 212 पेंशनधारियों को नियमित भुगतान सुनिश्चित किया है और 75 हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने में सहयोग किया है।

सरकारी योजनाओं से जोड़ा, बढ़ाया सामाजिक सुरक्षा दायरा

उन्होंने 900 लोगों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, 200 लोगों को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और 40 लोगों को अटल पेंशन योजना से जोड़ा है। इस प्रयास से ग्रामीणों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मजबूत हुई है।

गांव में डिजिटल सेवाओं की आसान उपलब्धता

संतोषी के सेवा केंद्र के माध्यम से ग्रामीणों को एलआईसी प्रीमियम जमा, मोबाइल-टीवी रिचार्ज, नगद जमा-निकासी, धन अंतरण, बिजली बिल भुगतान, आयुष्मान कार्ड निर्माण और पीएम किसान केवाईसी जैसी सुविधाएं सहज रूप से मिल रही हैं। इससे गांव में डिजिटल सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है।

कोरोना काल में भी जारी रखी सेवाएं

कोरोना महामारी के दौरान जब अधिकांश सेवाएं प्रभावित थीं, तब संतोषी सिन्हा ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए बैंकिंग सेवाएं जारी रखीं। वे घर-घर जाकर बुजुर्गों को पेंशन और श्रमिकों को भुगतान उपलब्ध कराती रहीं, जिससे उन्हें गांव में विशेष पहचान मिली।

आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम

वर्तमान में संतोषी सिन्हा प्रति माह लगभग 10 से 11 हजार रुपये तक का कमीशन अर्जित कर रही हैं और अब तक करीब 6.25 लाख रुपये की आय प्राप्त कर चुकी हैं। उनकी यह सफलता उनकी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रमाण है।

ग्रामीण सशक्तिकरण का प्रेरणादायक उदाहरण

संतोषी सिन्हा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से शासन की योजनाओं को जमीन पर उतारते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल समावेशन और आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं।

Leave a Comment