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महिलाएं दिनभर अपनी संतान की लंबी उम्र एवं परिवार में खुशहाली के लिए हलषष्ठी का रखा व्रत

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दुर्ग।संतान की दीर्घायु व घर मे सुख शांति को लेकर शनिवार को महिलाओ ने हलषष्ठी का व्रत रखा।पुत्र के दीर्घायु होने की कामना को लेकर किया जाने वाला व्रत बड़ी संख्या में महिलाओ ने रखा था।इसके लिए मीनाक्षी नगर, चन्द्राकर भवन के पीछे सामूहिक रूप से पूजा की व्यवस्था की गई।इस अवसर पर नेहा साहू, ज्योति यादव, कल्याणी साहू, तारणी साहू,नूतन साहू,नीलिमा यादव,प्रियंका आदि सहित सभी महिलाओ ने मिलकर पूजा अर्चना कर पुत्र के दीर्घायु होने की कामना की।पूजा के अवसर पर महिलाओं ने बताया कि हलषष्ठी को लेकर कई दिनों पहले ही तैयारी की जाती है।

यह पूजा संतान की लंबी उम्र की कामना को लेकर की जाती है। संतान की दीर्घायु और खुशहाली की कामना को लेकर महिलाओं ने शनिवार को कमरछठ का व्रत रखा ओर पूजा पाठ की। पूजा कर रही दुर्गेश बाजपेई और कुसुम परिहार ने कहा कि इस व्रत में महिलाएं पसहर चावल ,कच्चा दूध , आंवला के साथ 6 प्रकार की भाजियों का विशेष महत्व है। पूजा के बाद महिलाओं ने कथा सुनी।महिलाओं ने माता हलषष्ठी की कथा सुनी।कमरछठ पर्व के अवसर पर हलषष्ठी माता की पूजा अर्चना करते हुए मीनाक्षी नगर की महिलाओं ने माता हलषष्ठी की कथा सुनी।

इसी दिन पैदा हुए थे बलराम:पूजा के दौरान महिलाओ ने कहा महिलाओ भादों कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। कृषि कार्यों में इस्तेमाल किए जाने वाले हल को शस्त्र के रूप में बलराम धारण करते थे। इसके चलते इस पर्व को हलषष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। हलषष्ठी व्रत की पूजा में बिना हल जोते पैदा होने वाले अनाज के अलावा छह प्रकार की भाजी का भोग लगाकर पूजा-अर्चना करने की मान्यता है।माता देवकी ने रखा था व्रत:महिलाओ ने बताया कि द्वापर युग में माता देवकी के 6 पुत्रों को जब उसके भाई कंस के आदेश पर मार दिया गया तब देवर्षि नारदजी की प्रेरणा से माता देवकी ने छठ माता का व्रत रखा जिससे उनके संतान की रक्षा हुई। इसी मान्यता के चलते छठ पूजा की जाती है। भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। बलराम शस्त्र के रूप में कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाले हल को धारण करते थे।

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