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आपातकाल लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला था : लता उसेंडी

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ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोंडागांवकोंडागांव, पूर्व मंत्री एवं कोंडागांव विधायक सुश्री लता उसेंडी ने 25 जून 1975 को लागू किए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय बताते हुए कहा कि यह देश के लोकतांत्रिक इतिहास पर सबसे बड़ा हमला था। आपातकाल की बरसी पर आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक अधिकारों और संविधान की भावना की रक्षा करने का आह्वान किया।

21 माह तक प्रभावित रहे नागरिक अधिकार

लता उसेंडी ने कहा कि 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक चले आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए थे। विपक्षी नेताओं को जेलों में बंद किया गया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में लागू आपातकाल के कारण संविधान द्वारा प्रदत्त कई अधिकार व्यावहारिक रूप से निष्प्रभावी हो गए थे।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदले राजनीतिक हालात

उन्होंने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद देश की राजनीतिक परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आया, जिसके बाद आपातकाल लागू किया गया। इस दौरान हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों के सदस्यों और विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया।

कई बड़े नेताओं को भेजा गया था जेल

लता उसेंडी ने बताया कि आपातकाल के दौरान लोकनायक जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मोरारजी देसाई, जॉर्ज फर्नांडिस, रामविलास पासवान और शरद यादव सहित अनेक प्रमुख नेताओं को जेल भेजा गया था। उन्होंने कहा कि यह दौर लोकतांत्रिक असहमति को दबाने का प्रयास था।

प्रेस सेंसरशिप को बताया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार

प्रेस वार्ता में उन्होंने मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय प्रेस सेंसरशिप लागू की गई थी, कई समाचार पत्रों के प्रकाशन पर रोक लगाई गई और पत्रकारों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

युवाओं से इतिहास जानने की अपील

लता उसेंडी ने कहा कि देश के युवाओं को आपातकाल के इतिहास का अध्ययन करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं है, बल्कि विचारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति, राजनीतिक असहमति का सम्मान और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा भी इसकी आधारशिला है।

लोकतंत्र सेनानियों को दी श्रद्धांजलि

प्रेस वार्ता के अंत में लोकतंत्र सेनानियों और आपातकाल के दौरान संघर्ष करने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष नरपति पटेल, पूर्व जिला अध्यक्ष मनोज जैन, गोपाल दीक्षित, कुलवंत सिंह चहल, हिना श्रीवास्तव, दयाराम पटेल, अश्वनी पांडे, जैनेंद्र ठाकुर सहित भाजपा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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