दुर्ग। रसमड़ा हाईवे पर एक अज्ञात शव मिलने से शुरू हुई यह घटना अंततः मानवता की जीत और सामाजिक दकियानूसी सोच की हार साबित हुई। पुलिस चौकी अंजोरा की टीम ने शव की पहचान ग्राम अंजोरा निवासी मेघनाथ देशमुख के रूप में की।
परिजनों से संपर्क किया गया, लेकिन परिजनों ने सामाजिक कारणों से अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। पुलिस ने मर्ग कायम कर विवेचना शुरू की।
मेघनाथ देशमुख की जिंदगी पहले से ही संघर्षपूर्ण थी। उनकी पत्नी बहुत पहले उन्हें छोड़कर चली गई थी। बाद में उन्होंने विजातीय महिला से विवाह कर लिया, जिसके चलते परिवार ने सभी रिश्ते तोड़ लिए। अकेलेपन में वे घुमंतू जीवन जीने लगे और समाज से कटकर रह गए। अंतिम समय में न परिवार साथ था, न पत्नी।
इसी निराशा भरे माहौल में धारा न्यूज डिजिटल मीडिया के संपादक गुलाब देशमुख ने अपनी टीम के साथ सोशल मीडिया पर अपील की कि हर व्यक्ति का अंतिम संस्कार उसका मौलिक अधिकार है। अपील का असर हुआ।
दुर्ग जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रूपेश पांडे ने अपनी सहृदयता दिखाते हुए अंतिम संस्कार की पूरी सामग्री उपलब्ध कराई। एक मानव समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुबोध देव के मार्गदर्शन में और जिला अध्यक्ष नितेश साहू की निर्देशन में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई।
पोस्टमार्टम और पुलिसिया कार्रवाई पूरी होने तक परिजन मौजूद रहे, लेकिन अंतिम संस्कार के समय वे वापस चले गए। फिर भी मेघनाथ अकेले नहीं छोड़े गए। नव दृष्टि फाउंडेशन के राज अड़तीया, शरद पंसारी, खोमेंद्र साहू और अन्य सहयोगियों ने सक्रिय सहयोग किया।
मुखाग्नि गुलाब देशमुख ने स्वयं दी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा,
“अंतिम संस्कार प्रत्येक इंसान का मौलिक अधिकार है। समाज को इस दकियानूसी सोच से बाहर आना होगा। यह सोच जहर की तरह काम कर रही है। तथाकथित समाज को मानवता की कार्यशाला साल में कम से कम 6 बार आयोजित करनी चाहिए, ताकि ऐसी संकीर्ण सोच खत्म हो सके।”
मेघनाथ देशमुख की अस्थियों का विसर्जन भी शीघ्र किया जाएगा।
यह घटना केवल एक शव की कहानी नहीं, बल्कि उस समाज की भी है जो रक्त संबंधों से ऊपर उठकर इंसानियत को अपनाता है। जहां परिवार ने साथ छोड़ दिया, वहां अजनबियों ने सम्मान दिया।








