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बस्तर की सेवा को सम्मान, गोडबोले दंपत्ति पद्म श्री से सम्मानित

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ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोण्डागांवनई दिल्ली, 25 मई।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘पद्म पुरस्कार 2026’ समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में जनजातीय स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले और श्रीमती सुनीता गोडबोले को संयुक्त रूप से ‘पद्म श्री’ पुरस्कार से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें चिकित्सा सेवा, कुपोषण उन्मूलन और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए तीन दशकों से अधिक समय तक किए गए समर्पित कार्यों के लिए प्रदान किया गया।

राष्ट्रपति भवन में हुआ सम्मान समारोह

देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कार समारोह में इस वर्ष कुल 131 हस्तियों को सम्मानित किया गया। इनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार शामिल रहे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि इन विभूतियों की सेवा और समर्पण देश की नई पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पद्म पुरस्कार विजेता समाज परिवर्तन के वास्तविक पथ-प्रदर्शक हैं।

1990 से बस्तर में सेवा का संकल्प

मूलतः महाराष्ट्र निवासी डॉ. रामचंद्र गोडबोले आयुर्वेद चिकित्सक हैं, जबकि उनकी पत्नी श्रीमती सुनीता गोडबोले ने सामाजिक कार्य में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की है। वर्ष 1990 में विवाह के बाद दोनों ने बस्तर के दंतेवाड़ा जिले के बारसूर क्षेत्र में जाकर जनजातीय समाज की सेवा का संकल्प लिया।

डॉ. गोडबोले ने वनवासी कल्याण आश्रम के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में अबूझमाड़ क्षेत्र के समीप एक छोटे क्लिनिक से सेवा कार्य शुरू किया। उन्होंने दूरस्थ वन क्षेत्रों में गरीब आदिवासी मरीजों का निःशुल्क उपचार किया।

हजारों ग्रामीणों तक पहुंची स्वास्थ्य सेवा

प्रारंभिक 12 वर्षों में डॉ. गोडबोले ने 3 हजार से अधिक गंभीर रूप से बीमार आदिवासियों का उपचार किया। इसके बाद उन्होंने जंगलों के भीतर 114 से अधिक चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया, जिनके माध्यम से 9 हजार से अधिक ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की गई।

इन शिविरों के जरिए 400 से अधिक गंभीर मरीजों को रायपुर के चैरिटेबल अस्पतालों में भेजकर उपचार भी उपलब्ध कराया गया।

कुपोषण उन्मूलन में निभाई बड़ी भूमिका

श्रीमती सुनीता गोडबोले ने बस्तर की स्थानीय बोलियां गोंडी और हलबी सीखकर जनजातीय महिलाओं और बच्चों के बीच सीधा संवाद स्थापित किया। उनके प्रयासों से बस्तर के तीन जिलों के 37 विद्यालयों के लगभग 2 हजार बच्चे प्रतिवर्ष स्वास्थ्य और पोषण जागरूकता कार्यक्रमों से जुड़ रहे हैं।

पिछले पांच वर्षों में उनके व्यक्तिगत प्रयासों से 24 गांवों के 460 बच्चों को गंभीर कुपोषण से बाहर निकाला गया है।

सिकल सेल और बालिका शिक्षा पर भी कार्य

गोडबोले दंपत्ति ने सिकल सेल एनीमिया जागरूकता, बाल अधिकार संरक्षण और आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा व आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए हैं। वर्तमान में दोनों “बनफूल” नामक संगठन के माध्यम से बस्तर में जनजातीय बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर कार्य कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण

छत्तीसगढ़ सरकार और राज्य प्रशासन ने गोडबोले दंपत्ति को मिले ‘पद्म श्री’ सम्मान को राज्य के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है। प्रशासन का कहना है कि यह सम्मान बस्तर के जनजातीय समाज के संघर्ष, सेवा और स्वास्थ्य अधिकारों को मिली राष्ट्रीय पहचान है।

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