गुजरात एंटी टेरेरिस्ट स्क्वैड (ATS) ने हाल ही में एक ऐसी आतंकी साजिश का पर्दाफाश किया है जिसने पूरे देश की सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है। यह साजिश किसी बम धमाके की नहीं, बल्कि एक “बायो-केमिकल अटैक” की थी — जिसमें इस्तेमाल किया जाना था एक ऐसा ज़हर जो कुछ ही माइक्रोग्राम में इंसान की जान ले सकता है — रिसिन (Ricin)।
इस खतरनाक प्लॉट का खुलासा तब हुआ जब गुजरात ATS ने ISIS से जुड़े तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया। इनमें सबसे अहम नाम हैदराबाद के 35 वर्षीय डॉक्टर अहमद मोहियुद्दीन सैयद का है। डॉक्टर अहमद के पास से रिसिन नामक घातक रासायनिक जहर बरामद किया गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी इस जहर को एक बायो-वेपन (Bio-Weapon) के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा था।
🧬 क्या है रिसिन (Ricin)?
रिसिन एक टॉक्सिक प्रोटीन है जो अरंडी के बीजों (Castor Beans) से बनता है। यह प्राकृतिक रूप से तो एक साधारण बीज का हिस्सा है, लेकिन थोड़ी सी प्रक्रिया के बाद यह इंसान के लिए सबसे खतरनाक ज़हरों में से एक बन जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सिर्फ 5 माइक्रोग्राम रिसिन अगर किसी व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाए — चाहे वह सांस, इंजेक्शन या निगलने से हो — तो 36 से 72 घंटे के भीतर उसकी मौत निश्चित है। इसका कोई एंटीडोट या इलाज मौजूद नहीं है।
रिसिन शरीर में पहुंचते ही कोशिकाओं के प्रोटीन उत्पादन को रोक देता है, जिससे किडनी, लिवर और फेफड़े धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं। लक्षणों में तेज पेट दर्द, उल्टी, खून की उल्टी, फेफड़ों में सूजन और सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं।
कैसे बनी थी साजिश
गुजरात ATS के अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार डॉक्टर पिछले छह महीनों से बायो-केमिकल अटैक की तैयारी में जुटा था। उसने इंटरनेट से रिसिन तैयार करने की विधि सीखी और अरंडी के बीजों से इसे निकालने की कोशिश भी की।
जांच में सामने आया है कि वह दिल्ली की आजादपुर मंडी, अहमदाबाद की नरोदा फल मंडी, और लखनऊ के आरएसएस कार्यालय के पास भी गया था। आशंका जताई जा रही है कि आरोपी इन भीड़भाड़ वाले इलाकों में रिसिन स्प्रे या फूड कंटैमिनेशन के जरिए हमला करने की योजना बना रहा था।
सूत्रों का कहना है कि आरोपी डॉक्टर ISIS के ऑनलाइन मॉड्यूल से जुड़ा हुआ था, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए भारत में आतंक फैलाने की कोशिश कर रहा है। एटीएस ने आरोपी के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, लैपटॉप और मोबाइल से कई संदिग्ध चैट और डॉक्यूमेंट्स बरामद किए हैं।
⚠️ कितना आसान है इसका बनना
रिसिन की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह अरंडी के बीजों से आसानी से निकाला जा सकता है, जो आमतौर पर हर घर में अरंडी के तेल के रूप में मिलते हैं। इससे इसकी उपलब्धता आसान हो जाती है और यही वजह है कि आतंकी संगठन इसे “गरीबों का बायो-हथियार” कहते हैं — सस्ता, आसान और बेहद घातक।
जांच जारी:-
फिलहाल गुजरात ATS ने आरोपी डॉक्टर को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। टीम यह भी जांच रही है कि उसके साथ और कौन लोग जुड़े थे और क्या भारत के अन्य हिस्सों में भी इस तरह की साजिशें पनप रही हैं।
केंद्रीय एजेंसियां इस केस को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए “हाई अलर्ट केस” के रूप में देख रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना से साफ है कि भारत को अब बायो-टेररिज़्म (Bio-Terrorism) के खतरे को भी गंभीरता से लेना होगा।
निष्कर्ष:
गुजरात ATS की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आतंकवाद अब सिर्फ गोलियों या बमों से नहीं, बल्कि रासायनिक और जैविक हथियारों से भी फैलाया जा सकता है। रिसिन जैसे घातक ज़हर से जुड़ा यह केस भारत में आतंकी रणनीति के बदलते रूप की ओर इशारा करता है — जहाँ ज्ञान, इंटरनेट और विज्ञान का गलत इस्तेमाल विनाश की दिशा में किया जा रहा है।








