रिपोर्ट: विशेष संवाददाता
नंदिनी-दुर्ग।गांव की सुनसान सड़कें, बंद पड़ी ज्वेलरी दुकानें और अंधेरे में गूंजती मोटरसाइकिलों की घर्र-घर्र आवाज़। यही वो माहौल था जिसमें एक गिरोह कई दिनों से देहात की ज्वेलरी शॉप्स को निशाना बना रहा था। लेकिन कहते हैं न—”चोर कितना भी शातिर क्यों न हो, पुलिस की नजर से बच नहीं सकता।” आखिरकार यह गिरोह नंदनी पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त कार्रवाई में धर दबोचा गया।
वारदात का पैटर्न: पहले रेकी, फिर CCTV काटकर शटर उखाड़ते
गिरोह का तरीका बड़ा सुनियोजित था। चोरी की वारदात को अंजाम देने से पहले आरोपी गांव-गांव घूमकर दुकानों की रेकी करते। किस दुकान में सुरक्षा कमजोर है, किस दिन दुकान जल्दी बंद हो जाती है और कहां CCTV लगे हैं—इन सबकी बारीकी से जानकारी जुटाई जाती।
रात ढलते ही आरोपी पहुंचते, पहले CCTV को डिस्कनेक्ट करते और फिर सब्बल से शटर उखाड़कर दुकान में घुस जाते।
दो वारदातें बनीं पुलिस की नींद हराम करने वाली
10 अगस्त की रात, ग्राम मेढेसरा। माॅ दुर्गा ज्वेलर्स का शटर टूटा और देखते ही देखते हजारों के जेवर गायब। दुकानदार ने सुबह दुकान खोली तो सब कुछ अस्त-व्यस्त मिला। इसी बीच 16 अगस्त की रात ग्राम कोड़िया में भावना ज्वेलर्स में भी वही मंजर दोहराया गया।
लगातार दो वारदातों से इलाके में दहशत का माहौल बन गया। व्यापारी दुकानें जल्दी बंद करने लगे और ग्रामीणों ने रात में पहरा देना शुरू कर दिया।
CCTV बना पुलिस का सबसे बड़ा हथियार
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने इन मामलों को गंभीर मानते हुए साइबर टीम और नंदनी पुलिस को तुरंत एक्शन में लगाया। टीम ने जब आसपास के CCTV फुटेज खंगाले, तो चोरों की हरकतें कैमरे में कैद मिलीं। पुलिस ने मुखबिरों को भी सक्रिय किया।
तभी खुलासा हुआ कि थाना छावनी का कुख्यात निगरानी बदमाश बादल सोनी हाल ही में बोडेगांव में किराये पर रह रहा है।
गिरफ्तारी का रोमांच
पुलिस ने घेराबंदी की और आखिरकार बादल सोनी को दबोच लिया। पूछताछ में बादल टूट गया और उसने अपने साथियों—सूरज कोसरे, नितिन झाडे और धनेश्वर साहू के नाम उगल दिए।
एक-एक कर सभी आरोपी पकड़े गए और उनके पास से करीब 3 किलो चांदी के जेवर, दो मोटरसाइकिल और वारदात में इस्तेमाल किया गया सब्बल बरामद किया गया।
गिरोह की कहानी: छोटे गांवों से शुरू, बड़े शहरों का सपना
दिलचस्प बात यह है कि ये चारों आरोपी पहले भी चोरी के मामलों में जेल जा चुके हैं। लेकिन इस बार उन्होंने शहर नहीं, बल्कि गांवों की दुकानों को आसान निशाना समझा। ग्रामीण इलाकों में पुलिस की गश्त कम होती है और दुकानों की सुरक्षा भी अक्सर कमजोर होती है—इसी सोच के चलते उन्होंने देहात का रुख किया।
लेकिन तकनीक और CCTV ने उनकी हर चाल नाकाम कर दी।
राहत की सांस ले रहे व्यापारी
लगातार हो रही चोरी से गांवों के ज्वेलरी व्यापारी सहमे हुए थे। लेकिन गिरोह के पकड़े जाने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। दुकानदारों का कहना है कि अब उन्हें रात में दुकान बंद करने में डर नहीं लगेगा।
गिरफ्तार आरोपी
1. बादल सोनी (32 वर्ष) – केम्प 1, थाना छावनी।
2. सूरज कोसरे (22 वर्ष) – तिलईरवार, जिला राजनांदगांव।
3. नितिन झाडे (22 वर्ष) – तेलीटोला, जिला राजनांदगांव।
4. धनेश्वर साहू (28 वर्ष) – तिलईरवार, जिला राजनांदगांव।
पुलिस की चेतावनी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि व्यापारियों को अपनी दुकानों में CCTV, अलार्म सिस्टम और मजबूत ताले लगाने चाहिए। तकनीक से लैस होने पर चोरों के लिए वारदात को अंजाम देना बेहद मुश्किल हो जाता है।
अंतिम पंक्ति”देहात के सुनसान रास्तों पर अंधेरे की आड़ में वारदातें करने वाले नकाबपोश अब सलाखों के पीछे हैं। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि अपराधी कितना भी चालाक क्यों न हो, कानून के हाथ उससे लंबे ही होते हैं।”
आधी रात के नकाबपोश: देहात की ज्वेलरी दुकानों पर डाका डालने वाला गिरोह धरा गया








