ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोंडागांव । कोंडागांव, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिला न्यायालय कोण्डागांव में शनिवार को धारा 138 परक्राम्य लिखित अधिनियम, 1881 (चेक बाउंस प्रकरण) के तहत स्पेशल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान 28 प्रकरणों का आपसी सुलह-समझौते से निराकरण करते हुए 92,36,497 रुपये का अवार्ड पारित किया गया।
वर्चुअल माध्यम से हुआ शुभारंभ
स्पेशल लोक अदालत का शुभारंभ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने वर्चुअल माध्यम से किया। इसके बाद जिला न्यायालय परिसर कोण्डागांव में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष खिलावन राम रिगरी ने मां सरस्वती एवं महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
समझौते के माध्यम से त्वरित न्याय पर जोर
इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि स्पेशल लोक अदालत का उद्देश्य चेक अनादरण से जुड़े मामलों का आपसी सहमति, संवाद और समझौते के माध्यम से त्वरित, प्रभावी एवं स्थायी समाधान करना है। लोक अदालत में पक्षकारों को न्यायालयीन प्रक्रिया की औपचारिकताओं से अलग सौहार्दपूर्ण वातावरण में विवादों का समाधान करने का अवसर मिला। न्यायिक अधिकारियों ने पक्षकारों को आपसी विश्वास और संवाद के माध्यम से विवाद समाप्त करने के लिए प्रेरित किया।
चार खंडपीठों में हुई सुनवाई
स्पेशल लोक अदालत के लिए कुल चार खंडपीठों का गठन किया गया। इनमें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोण्डागांव, अपर जिला एवं सत्र न्यायालय नारायणपुर, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नारायणपुर तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी केशकाल की खंडपीठ शामिल रही।
इन खंडपीठों के समक्ष चेक बाउंस के 156 लंबित प्रकरण तथा 101 प्री-लिटिगेशन प्रकरण रखे गए। सुनवाई के दौरान 28 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया और संबंधित पक्षकारों के पक्ष में 92.36 लाख रुपये का अवार्ड पारित किया गया।
समझौता करने वाले पक्षकारों को भेंट किए पौधे
लोक अदालत में प्रकरणों का समाधान कराने वाले पक्षकारों को न्यायिक अधिकारियों द्वारा काजू, कटहल और नींबू के पौधे भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही उनसे पौधों का रोपण एवं नियमित देखभाल करने तथा पर्यावरण संरक्षण के अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की गई।
पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
न्यायिक अधिकारियों ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। एक पौधा केवल हरियाली ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर भी है। इसलिए सभी नागरिकों को अधिक से अधिक पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण में योगदान देना चाहिए।








