ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोण्डागांव। कोण्डागांव, सहकारी सप्ताह के द्वितीय दिवस जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, कोण्डागांव शाखा के सभाकक्ष में जिला सहकारी विकास समिति (डीसीडीसी), किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) एवं प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) की भूमिका विषय पर विचार गोष्ठी एवं व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिले की सभी पैक्स एवं लैम्प्स के प्राधिकृत अधिकारियों ने भाग लिया।
सहकारिता के समन्वय से किसानों को मिलेगा अधिक लाभ
कार्यक्रम का उद्देश्य सहकारी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर कृषि के विविधीकरण, मूल्य संवर्धन तथा किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना था। इस दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और सहकारी योजनाओं से जोड़ने पर विशेष बल दिया।
एफपीओ और पैक्स निभा सकते हैं अहम भूमिका
जिला विपणन अधिकारी एस.के. कनौजिया ने जिला सहकारी विकास समिति (डीसीडीसी) की भूमिका एवं महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सहकारिता से जुड़ी संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से किसानों को अधिकतम लाभ मिल सकता है। उन्होंने बताया कि एफपीओ एवं पैक्स किसानों को संगठित कर सामूहिक क्रय-विक्रय, प्रसंस्करण, भंडारण तथा विपणन की बेहतर व्यवस्था विकसित कर सकते हैं, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उन्होंने अधिकारियों से किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों एवं सहकारी योजनाओं से अधिक से अधिक जोड़ने का आह्वान किया।
मिलेट्स और जैविक खेती पर दिया गया जोर
सहकारिता विभाग के एआरसीएस उदय भान ठाकुर ने मिलेट्स आधारित खेती, जैविक कृषि तथा मूल्य संवर्धन के विभिन्न आयामों की जानकारी देते हुए कहा कि मोटे अनाजों की बढ़ती मांग किसानों के लिए आय बढ़ाने का बेहतर अवसर है। उन्होंने वैज्ञानिक एवं आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
बहुफसलीय खेती अपनाने की अपील
नोडल अधिकारी ललिता मरकाम एवं सहायक पर्यवेक्षक के.एल. पाण्डेय ने किसानों को जैविक खेती, उन्नत कृषि तकनीकों, मिलेट्स उत्पादन तथा एफपीओ गतिविधियों से जोड़ने के लिए योजनाबद्ध कार्य करने का आह्वान किया। वहीं विभिन्न लैम्प्स के प्राधिकृत अधिकारियों ने धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन, मिलेट्स, सब्जी एवं बागवानी जैसी बहुफसलीय खेती अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित करने पर जोर दिया।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने अपने अनुभव एवं सुझाव साझा करते हुए सहमति व्यक्त की कि सहकारी संस्थाओं, एफपीओ एवं पैक्स के समन्वित प्रयासों से किसानों को आधुनिक तकनीक, जैविक खेती, मूल्य संवर्धन तथा बेहतर विपणन व्यवस्था से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति दी जा सकती है।








