सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक बेहद दुखद और डरावनी खबर सामने आई है। जिले के लुण्ड्रा वन परिक्षेत्र में एक दंतैल (अकेला और आक्रामक) हाथी ने पिछले 15 घंटों में चार ग्रामीणों की जान ले ली है। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना दिया है। स्थानीय ग्रामीणों में जबरदस्त डर है, वहीं वन विभाग की लापरवाही पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, यह दंतैल हाथी बलरामपुर जिले के राजपुर वन परिक्षेत्र से भटकते हुए सरगुजा जिले के लुण्ड्रा क्षेत्र में प्रवेश कर गया। धौरपुर, चेंद्रा, उदारी, असकला होते हुए हाथी ग्राम पंचायत चिरगा तक पहुंच गया। यहां पहुंचते ही मौत का तांडव शुरू हो गया।
पहली घटना – पिता-पुत्री की दर्दनाक मौत
पहली और सबसे दर्दनाक घटना ग्राम पंचायत चिरगा के बेवरा गांव की है। यहां के निवासी राम कोरवा अपनी बेटी के साथ खेत से रोपा लगाकर घर लौट रहा था। जैसे ही दोनों रास्ते में थे, अचानक उनका सामना हाथी से हो गया। खतरे को भांपते हुए राम कोरवा अपनी बेटी के साथ जान बचाकर भागने लगा, लेकिन हाथी ने दोनों को दौड़ाकर पकड़ लिया। पहले उन्हें पटक दिया और फिर कुचलकर दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
इस घटना से पूरे गांव में मातम फैल गया। राम कोरवा का परिवार बेहद गरीब था और बेटी की हाल ही में सगाई हुई थी।
दूसरी घटना – घर में घुसे हाथी ने महिला को मारा
दूसरी घटना पास के ही बकिला गांव में हुई। यहां सनमेत बाई नाम की महिला अपने पति नेहरू कंवर के साथ घर में थी। अचानक हाथी गांव में घुस आया। दोनों पति-पत्नी जान बचाकर भागने लगे, लेकिन हाथी ने महिला को पकड़ लिया और कुचलकर मार डाला। पति किसी तरह जान बचाने में सफल रहा, लेकिन अपनी पत्नी को मरते देख वह सदमे में है।
तीसरी घटना – खेत में अकेले गए ग्रामीण की मौत
तीसरी घटना लुण्ड्रा वन परिक्षेत्र से करीब 65 किलोमीटर दूर सीतापुर वन परिक्षेत्र के ग्राम देवगढ़ की है। यहां सुबह 6 बजे ग्रामीण मोहर साय सैराम अपने खेत में गया था। खेत में उसका सामना दो हाथियों से हो गया। मोहर साय ने भागने की कोशिश की, लेकिन हाथियों में से एक ने उसे दौड़ाकर पकड़ लिया और कुचलकर उसकी भी जान ले ली।
वन विभाग की लापरवाही बनी जानलेवा
इन घटनाओं के बाद ग्रामीणों में भारी गुस्सा और आक्रोश है। लोगों का कहना है कि हाथी के मूवमेंट की जानकारी पहले से थी, लेकिन वन विभाग की टीम ने समय पर ग्रामीणों को कोई चेतावनी नहीं दी। हाथी के चिरगा पहुंचने के बाद भी ग्रामीणों को अलर्ट नहीं किया गया। अगर समय रहते जानकारी मिलती तो ये जानें बचाई जा सकती थीं।
चार मौतों के बाद वन विभाग हरकत में आया और आसपास के आधा दर्जन गांवों में अलर्ट जारी किया गया। डीएफओ के निर्देश पर हाथी पर नजर रखने के लिए विशेष दल तैनात किया गया है और प्रभावित क्षेत्रों में पेट्रोलिंग तेज कर दी गई है।
हर साल दोहराती है ऐसी त्रासदी
छत्तीसगढ़ के सरगुजा, कोरबा, रायगढ़ और बलरामपुर जिले हर साल हाथियों के आतंक से जूझते हैं। जंगल कटने और हाथियों के प्राकृतिक मार्गों में अतिक्रमण के कारण हाथी अब मानव बस्तियों की ओर बढ़ते जा रहे हैं। इन टकरावों में हर साल कई लोग मारे जाते हैं और फसलें भी बर्बाद होती हैं।
समाधान की जरूरत
ग्रामीणों का कहना है कि केवल हाथी को खदेड़ना या अलर्ट जारी करना स्थायी समाधान नहीं है। सरकार को हाथियों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर बनाना चाहिए और संवेदनशील गांवों में स्थायी निगरानी व्यवस्था करनी चाहिए।
जब तक वन विभाग केवल घटना के बाद ही जागता रहेगा, तब तक ऐसी दर्दनाक घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। जरूरत है पूर्व चेतावनी प्रणाली, सक्रिय वन अमले और ग्रामीणों को समय पर सूचना देने की व्यवस्था की।
निष्कर्ष:
सरगुजा की यह घटना एक बार फिर यह बताती है कि मनुष्य और वन्य जीवों के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है। अगर वन विभाग समय रहते कदम उठाता तो चार निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सकती थी। यह हादसा केवल हाथी के हमले का नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का भी दुखद उदाहरण है।
सरगुजा में दंतैल हाथी का कहर: 15 घंटे में चार लोगों की दर्दनाक मौत, वन विभाग की लापरवाही उजागर








