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तेंदूपत्ता और तीखुर से बड़ेकनेरा बना आत्मनिर्भरता का मॉडल

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ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोंडागांव। कोंडागांव, सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सोमवार को कोंडागांव जिले के ग्राम बड़ेकनेरा पहुंचकर वन विभाग की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों से मुलाकात की। उन्होंने तेंदूपत्ता संग्राहकों, महिला स्व-सहायता समूहों, विद्यार्थियों और किसानों से चर्चा कर योजनाओं से आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का संचालन नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सम्मानजनक आजीविका, शिक्षा, आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार तैयार करना है।

तेंदूपत्ता संग्रहण से बढ़ी ग्रामीण परिवारों की आय

मुख्यमंत्री सबसे पहले तेंदूपत्ता संग्राहक श्रीमती वेदबती यादव के घर पहुंचे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 3720 गड्डी तेंदूपत्ता संग्रहित कर 20 हजार 460 रुपये की आय अर्जित की है। उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता संग्रहण अब उनके परिवार के लिए नियमित और भरोसेमंद आय का स्रोत बन गया है।

मुख्यमंत्री ने उनके परिश्रम की सराहना करते हुए कहा कि वन संपदा आधारित आजीविका ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

तीखुर प्रसंस्करण से महिला समूह बना आत्मनिर्भर

मुख्यमंत्री ने वन धन विकास केंद्र मर्दापाल से जुड़ी मां शीतला स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती विमला भोयर से भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि मात्र एक माह में 85 किलोग्राम तीखुर का प्रसंस्करण कर लगभग 85 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई है।

श्रीमती भोयर ने कहा कि पहले वन उत्पादों का सीमित उपयोग होता था, लेकिन अब प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से बेहतर आय प्राप्त हो रही है। मुख्यमंत्री ने इसे महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

इस अवसर पर हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री का जामुन, आम और तीखुर से बने पारंपरिक शरबत से स्वागत किया।

छात्रवृत्ति से बढ़े शिक्षा के अवसर

मुख्यमंत्री ने तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार की बेटी राजबती मंडावी से भी संवाद किया। राजबती को कक्षा 12वीं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने पर तेंदूपत्ता हितग्राही छात्रवृत्ति योजना के तहत 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिली है।

मुख्यमंत्री ने उनकी उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि वन आधारित योजनाएं केवल आजीविका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों के सपनों को साकार करने का भी माध्यम बन रही हैं।

खेती और मत्स्य पालन के एकीकृत मॉडल की सराहना

मुख्यमंत्री ने किसान श्री गौतम यादव के खेत और तालाब का निरीक्षण किया। श्री यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और कृषि उन्नति योजना सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलने से खेती और मत्स्य पालन को एक साथ जोड़कर आय में वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन का समन्वित मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत किया पौधरोपण

बड़ेकनेरा प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

उन्होंने लोगों से अधिकाधिक वृक्षारोपण करने का आह्वान करते हुए कहा कि पेड़ केवल पर्यावरण संरक्षण ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्धि और सुरक्षा का आधार भी हैं।

वन विभाग की योजनाओं के तहत हितग्राहियों को मिला लाभ

कार्यक्रम में वन विभाग की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया।

मर्दापाल परिक्षेत्र

  • किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत 2 किसानों को 5,500 नीलगिरी पौधे वितरित किए गए।
  • विद्यार्थियों को 25-25 हजार रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई।
  • राजमोहिनी देवी तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत 3 हितग्राहियों को कुल 6.30 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई।

बड़ेडोंगर परिक्षेत्र

  • किसानों को 2,500 नीलगिरी पौधे वितरित किए गए।
  • एक तेंदूपत्ता संग्राहक को 20,460 रुपये का भुगतान किया गया।
  • विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति राशि प्रदान की गई।
  • वन प्रबंधन समिति कमेला को 8.46 लाख रुपये का लाभांश दिया गया।

नारंगी परिक्षेत्र

  • एक हितग्राही को तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए 21,873.50 रुपये का भुगतान किया गया।
  • विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देकर शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया गया।

वन आधारित अर्थव्यवस्था से आत्मनिर्भर गांवों की ओर बढ़ता बस्तर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वन विभाग की योजनाएं केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आजीविका, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और आत्मविश्वास को भी मजबूत कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों, महिलाओं, किसानों और विद्यार्थियों को योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है और वन आधारित अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर गांवों की दिशा में मजबूत आधार बन रही है।

कार्यक्रम में विधायक सुश्री लता उसेंडी, विधायक श्री नीलकंठ टेकाम, कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

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