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हेल्थ अलर्ट रिपोर्ट : “एक मामूली एक्स-रे की कीमत – शरीर को एक साल तक भरपाई करनी पड़ती है”

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रायपुर।अक्सर लोग सोचते हैं कि एक साधारण एक्स-रे करवाना पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन मेडिकल रिसर्च और रेडिएशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक्स-रे से निकलने वाली आयनाइजिंग रेडिएशन शरीर पर इतना असर डालती है कि कोशिकाओं (Cells) को हुए नुकसान की भरपाई में शरीर को महीनों से लेकर सालभर तक का समय लग सकता है।


⚠️ रेडिएशन क्या करता है?

एक्स-रे में उपयोग होने वाली आयनाइजिंग रेडिएशन सीधे डीएनए और कोशिकाओं पर असर डालती है।

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि हर एक्स-रे से शरीर में हजारों कोशिकाएं प्रभावित होती हैं।

शरीर की Immune System और Repair Mechanism इन क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को ठीक करने में लग जाते हैं।

National Cancer Institute (NCI) और World Health Organization (WHO) की रिपोर्ट में बताया गया है कि लगातार रेडिएशन एक्सपोज़र से कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

डेटा के साथ समझें-

1. एक चेस्ट एक्स-रे = लगभग 0.1 mSv (मिलीसिवर्ट) रेडिएशन डोज़
यह प्राकृतिक तौर पर हमें मिलने वाले 10 दिन के रेडिएशन के बराबर है।

2. एक CT स्कैन = 100–200 चेस्ट एक्स-रे के बराबर डोज़

यानी 10–20 mSv तक, जो शरीर के लिए कई महीनों की प्राकृतिक रेडिएशन खुराक से भी ज्यादा है।

3. शोध बताते हैं कि शरीर को इस नुकसान की पूर्ण भरपाई करने में लगभग 6–12 महीने तक का समय लगता है।


विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टरों का मानना है –
एक्स-रे जरूरी होने पर ही करवाना चाहिए।
बार-बार करवाने से बचना चाहिए।
बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह और भी खतरनाक हो सकता है।
डिजिटल एक्स-रे पुराने तरीकों की तुलना में सुरक्षित हैं क्योंकि उनमें रेडिएशन डोज़ कम होती है।

जनता को जागरूक क्यों होना चाहिए?

आजकल अस्पतालों और छोटे क्लीनिकों में मामूली चोट, खांसी या बुखार पर भी अनावश्यक एक्स-रे लिख दिए जाते हैं। मरीज भी बिना पूछे मान लेते हैं कि यह सामान्य प्रक्रिया है।
लेकिन हकीकत यह है कि एक्स-रे सिर्फ तभी करवाना चाहिए जब डॉक्टर की ओर से यह मेडिकल रूप से बिल्कुल जरूरी हो।


समाधान और सावधानियां

  • 1. डॉक्टर से हमेशा पूछें – “क्या यह एक्स-रे वाकई जरूरी है?”
  • 2. यदि संभव हो तो MRI या अल्ट्रासाउंड जैसे नॉन-रेडिएशन विकल्प अपनाएं।
  • 3. बच्चों और गर्भवती महिलाओं को एक्स-रे से यथासंभव दूर रखें।
    • 4. सरकारी स्तर पर रेडिएशन सेफ्टी नियमों का कड़ाई से पालन जरूरी है।

यह खबर जनता को यह समझाने के लिए है कि “मामूली एक्स-रे कोई मामूली बात नहीं”।
इससे शरीर को हुए नुकसान की भरपाई भले ही शरीर कर लेता हो, लेकिन इसमें समय सालभर तक लग सकता है और यदि इसका दुरुपयोग किया जाए तो यह गंभीर बीमारियों की वजह भी बन सकता है।

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