दुर्ग।गुरु परंपरा हमेशा से बच्चों को जीवन का मार्ग दिखाने और भविष्य संवारने की रही है, लेकिन दुर्ग जिले में तस्वीर अब बदल चुकी है। यहां कई शिक्षक स्कूल की कक्षाओं के बजाय हर्बल लाइफ के “फिटनेस गुरु” बनकर प्रोटीन शेक, डाइट चार्ट और ऑनलाइन सेशन में व्यस्त नजर आ रहे हैं।
शिक्षक जो कभी बच्चों को शिक्षा देने का व्रत लेकर इस पेशे में आए थे, अब नेटवर्किंग बिज़नेस में ग्राहकों की तलाश में जुटे हैं। कक्षाओं की जगह मोबाइल मीटिंग्स ने ले ली है और ब्लैकबोर्ड की जगह अब सोशल मीडिया पोस्ट और व्हाट्सएप ग्रुप्स हावी हो गए हैं।
स्कूल समय में हर्बल सेशन!
सूत्रों के मुताबिक, कई शिक्षक स्कूल समय में ही ऑनलाइन हर्बल मीटिंग्स अटेंड करते हैं। बच्चे जब सवाल पूछते हैं तो उन्हें “बाद में बताऊंगा” कहकर टाल दिया जाता है। शिक्षण कार्य हाशिए पर चला गया है और फिटनेस फॉर्मूले नए पाठ्यक्रम की तरह पढ़ाए जा रहे हैं।
शिक्षा विभाग मौन क्यों?
यह मामला लंबे समय से सामने आ रहा है, लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सवाल यह है कि जब शिक्षक ही अपने मूल कर्तव्य से भटक जाएं तो बच्चों का भविष्य कौन सँभालेगा?
बच्चों की व्यथा
“सर हमें पढ़ाते नहीं, मोबाइल में मीटिंग करते रहते हैं। हम कुछ पूछते हैं तो कहते हैं बाद में बताऊँगा।” – यह मासूम शिकायत छात्रों की है। बच्चों की पढ़ाई से हो रहा यह खिलवाड़ चिंताजनक है।
नेटवर्किंग बिज़नेस बनाम शिक्षा
हर्बल लाइफ एक अंतरराष्ट्रीय वेलनेस कंपनी है, लेकिन दुर्ग में इसका रूप चौंकाने वाला है। शिक्षक खुद को “वेलनेस कोच” बताकर छात्रों के बजाय कस्टमर बनाने में ज्यादा रुचि ले रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाज़िमी है –
क्या शिक्षा अब साइड बिज़नेस बन चुकी है और असली पेशा MLM नेटवर्किंग?
ज़रूरत सख्त कदम की
विशेषज्ञ मानते हैं कि शिक्षा विभाग को तत्काल कड़ा निरीक्षण करना होगा। शिक्षक अगर शिक्षा छोड़ धंधे में मशगूल रहेंगे तो आने वाली पीढ़ी ज्ञान से वंचित होकर केवल प्रयोग की वस्तु बनकर रह जाएगी।
दुर्ग: शिक्षक बने हर्बल गुरु, पढ़ाई छोड़ MLM धंधे में व्यस्त








