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कोंडागांव से ऑक्सफोर्ड तक: शिक्षक विनायक कोहली ने जीता राष्ट्रीय पुरस्कार

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इंडियाज़ बेस्ट टीचर्स अवार्ड्स 2026 में भूगोल श्रेणी के राष्ट्रीय विजेता बने

ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोंडागांवकोंडागांव, बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का अवसर है। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय कोंडागांव के सामाजिक विज्ञान शिक्षक विनायक कोहली ने प्रतिष्ठित “इंडियाज़ बेस्ट टीचर्स अवार्ड्स 2026” में भूगोल श्रेणी का राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर कोंडागांव का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।

यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पहल शिव नादर फाउंडेशन एवं साईद बिजनेस स्कूल, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से प्रस्तुत की जाती है। इस उपलब्धि के बाद विनायक कोहली को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से जुड़े विशेष व्यावसायिक विकास कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर मिलेगा।

9,400 से अधिक प्रतिभागियों के बीच बनाई राष्ट्रीय पहचान

इस वर्ष पुरस्कार के लिए देश के 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 9,400 से अधिक पंजीकरण प्राप्त हुए थे। इनमें से केवल 79 शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर के फाइनल के लिए चुना गया।

राष्ट्रीय फाइनल का आयोजन 4 सितंबर 2026 को शिव नादर विश्वविद्यालय, दिल्ली-एनसीआर में किया गया। भूगोल, अर्थशास्त्र, भौतिकी, गणित, कंप्यूटर साइंस, अंग्रेजी, पर्यावरण विज्ञान तथा बिजनेस स्टडीज एंड एंटरप्रेन्योरशिप सहित आठ विषय श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा के बाद केवल 16 शिक्षकों को राष्ट्रीय विजेता चुना गया।

विनायक कोहली इन राष्ट्रीय विजेताओं में शामिल होकर बस्तर और कोंडागांव के लिए गौरव बने हैं।

बस्तर की लाल मिट्टी से पढ़ाया दुनिया का भूगोल

विनायक कोहली की विजेता प्रस्तुति का विषय था— “जियोग्राफी इज द मदर ऑफ एवरी सब्जेक्ट: टीचिंग द सॉइल्स ऑफ इंडिया एंड द वर्ल्ड थ्रू द डोमिनो इफेक्ट।”

उनकी प्रस्तुति का मुख्य विचार यह था कि भू-आकृति जलवायु को प्रभावित करती है, जलवायु मिट्टी को और मिट्टी मानव जीवन, भोजन, निर्माण, संस्कृति एवं सभ्यताओं के विकास को प्रभावित करती है।

उन्होंने कोंडागांव के कुम्हार पारा के कुम्हारों द्वारा बनाए गए मिट्टी के दीये, विद्यार्थियों द्वारा एकत्र किए गए मिट्टी के नमूने तथा भारत के नक्शे के फ्रीहैंड रेखाचित्र के माध्यम से अपनी व्यावहारिक और प्रश्न-आधारित शिक्षण शैली का प्रदर्शन किया।

सोशल साइंस लैब और मिनी बस्तर आर्ट म्यूजियम बना खास पहचान

विनायक कोहली द्वारा पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय कोंडागांव में विकसित सोशल साइंस लैब एवं मिनी बस्तर आर्ट म्यूजियम उनकी प्रस्तुति का प्रमुख आकर्षण रहा।

सीमित संसाधनों के बावजूद रचनात्मक तरीके से तैयार इस लैब में विद्यार्थियों द्वारा बनाया गया मिट्टी चार्ट और इंटरैक्टिव बजर-लाइट मूल्यांकन खेल शामिल है। यह गतिविधि विद्यार्थियों को उनके उत्तर और तर्क पर तुरंत प्रतिक्रिया देने में मदद करती है।

ढोकरा, टेराकोटा और संस्कृति को जोड़ा भूगोल से

कोहली ने अपनी प्रस्तुति में बस्तर की प्रसिद्ध ढोकरा और टेराकोटा शिल्प परंपराओं को भी भूगोल की शिक्षा से जोड़ा। उन्होंने भरतनाट्यम की अपनी साधना से प्रेरित “भूमि प्रणाम” के माध्यम से धरती को नमन करते हुए प्रस्तुति की शुरुआत की।

इस अनूठे प्रयोग ने भूगोल की कक्षा को बस्तर की जीवंत संस्कृति और स्थानीय जीवन से जोड़ने का प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत किया।

“भूगोल मेरे द्वारा पढ़ाए जाने वाले हर विषय की जननी है। परंतु यह मेरी भी माँ है—उसने कोंडागांव के एक बालक को एक दीया, एक भाषा और हर दिन कक्षा के सामने खड़े होने का एक कारण दिया।”
— विनायक कोहली

अब मिलेगा ऑक्सफोर्ड में विशेष प्रशिक्षण का अवसर

पुरस्कार के तहत विनायक कोहली अब पांच सप्ताह के हाइब्रिड व्यावसायिक विकास कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके बाद उन्हें साईद बिजनेस स्कूल, ऑक्सफोर्ड में एक सप्ताह के पूर्णतः वित्तपोषित आवासीय कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिलेगा।

यह उपलब्धि बस्तर के एक छोटे शहर के शिक्षक की शिक्षा और नवाचार की यात्रा को विश्व के प्रतिष्ठित शैक्षणिक मंच तक ले जाएगी।

विद्यार्थियों और संस्थान को दिया सफलता का श्रेय

विनायक कोहली ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने विद्यार्थियों को दिया, जिनकी जिज्ञासा और क्षेत्रीय कार्य उनकी प्रस्तुति की महत्वपूर्ण आधारशिला बने।

उन्होंने पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय कोंडागांव और केंद्रीय विद्यालय संगठन का भी आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने श्री भूपेश तिवारी, पूर्व सदस्य योजना आयोग, भारत सरकार, श्रीमती सोमा घोष, उप आयुक्त केवीएस रायपुर संभाग और डॉ. नीता मिश्रा के मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन को भी अपनी यात्रा में महत्वपूर्ण बताया।

कोंडागांव को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान

विनायक कोहली की यह उपलब्धि केवल एक शिक्षक की व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि कोंडागांव और बस्तर की मिट्टी, संस्कृति, शिल्प और शैक्षणिक नवाचार की राष्ट्रीय पहचान भी है।

अपनी प्रस्तुति में उन्होंने कोंडागांव को दुनिया के सामने लाने की भावना व्यक्त करते हुए कहा कि यह जीत उन लोगों तक भी कोंडागांव का नाम पहुंचाएगी जिन्होंने पहले कभी इस शहर को नक्शे पर नहीं देखा।

बस्तर की मिट्टी से शुरू हुई यह कहानी अब ऑक्सफोर्ड तक पहुंचेगी

राष्ट्रीय पुरस्कार के साथ कोंडागांव की मिट्टी, यहां के कारीगरों की कला और एक शिक्षक की रचनात्मक सोच अब देश की उत्कृष्ट शिक्षण पद्धतियों के बीच अपनी पहचान बना रही है। कोंडागांव से ऑक्सफोर्ड तक की यह यात्रा शिक्षा, नवाचार और स्थानीय संस्कृति को वैश्विक मंच से जोड़ने की प्रेरक कहानी बन गई है।

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