गारमेंट फैक्ट्री के कपड़ों के अपशिष्ट से बनेंगे गद्दे, कुशन और तकिए; 5 लाख रुपये की लागत से स्थापित हुई इकाई
ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोण्डागांव। कोण्डागांव, कोण्डागांव में कपड़ों के अपशिष्ट का उपयोग कर रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में पहल की गई है। बड़ेकनेरा मार्ग स्थित सर्व मांगलिक भवन में गुरुवार को कॉटन गद्दा निर्माण इकाई का शुभारंभ बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं कोण्डागांव विधायक लता उसेंडी ने किया। जिला प्रशासन की पहल पर लगभग 5 लाख रुपये की लागत से स्थापित इस इकाई में गारमेंट फैक्ट्री से निकलने वाले कपड़ों के अपशिष्ट से कॉटन गद्दे, कुशन और तकिए तैयार किए जाएंगे।
इस अवसर पर कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना, नगर पालिका अध्यक्ष नरपति पटेल, स्थानीय पार्षदगण और विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
कपड़ों के अपशिष्ट से तैयार होंगे उपयोगी उत्पाद
कॉटन गद्दा निर्माण इकाई का मुख्य उद्देश्य गारमेंट फैक्ट्रियों से निकलने वाले कपड़ों के अपशिष्ट का पुनः उपयोग सुनिश्चित करना और स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ना है। इस पहल के माध्यम से अनुपयोगी कपड़ों को उपयोगी उत्पादों में बदलकर पर्यावरण संरक्षण के साथ आजीविका के नए अवसर विकसित किए जाएंगे।
इकाई में तैयार होने वाले गद्दे, कुशन और तकिए स्थानीय स्तर पर उत्पादन एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देने में सहायक होंगे। यह पहल ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा पर आधारित है, जिसके तहत अपशिष्ट पदार्थों का उपयोग कर उपयोगी वस्तुओं का निर्माण किया जाता है।
विधायक लता उसेंडी ने प्रशिक्षणार्थियों को किया प्रोत्साहित
इकाई का शुभारंभ करते हुए विधायक लता उसेंडी ने सभी को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि कपड़ों के अवशेष से गद्दा निर्माण की पहल से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। साथ ही, अपशिष्ट का उपयोग सुनिश्चित होने से कोण्डागांव को स्वच्छ रखने की दिशा में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को पूरी ईमानदारी और लगन से प्रशिक्षण प्राप्त करने तथा आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जिस कार्य में व्यक्ति दक्षता हासिल करता है, उसी के माध्यम से वह अपनी अलग पहचान बना सकता है।
आत्मनिर्भर बनने के लिए कार्यकुशलता पर जोर
नगर पालिका अध्यक्ष नरपति पटेल ने गारमेंट फैक्ट्री से निकलने वाले कपड़ों के अपशिष्ट से गद्दे बनाने की पहल को उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर गद्दा निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और लोगों को इसका लाभ प्राप्त होगा।
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से अपने कार्य में कुशलता हासिल करने का आह्वान किया, ताकि वे भविष्य में स्वयं का रोजगार स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकें।
अपशिष्ट प्रबंधन के साथ आजीविका के नए अवसर
कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना ने कहा कि जिला प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य गारमेंट फैक्ट्री से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों का उपयोगी पुनः उपयोग सुनिश्चित करना और स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ना है। इससे अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा मिलने के साथ ही आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे।
उन्होंने बताया कि इस तरह की पहल से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार को प्रोत्साहित किया जा सकता है।
प्रत्येक हितग्राही को 7,500 से 10,000 रुपये मासिक आय की संभावना
जिला प्रशासन के अनुसार, वर्तमान में कॉटन गद्दा निर्माण इकाई संचालित है और यहां 10 हितग्राही कार्यरत हैं। प्रत्येक हितग्राही को लगभग 7,500 से 10,000 रुपये तक मासिक आय प्राप्त होने की संभावना है। इस इकाई के माध्यम से लगभग 30 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
इकाई की अनुमानित उत्पादन क्षमता प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 8 से 10 गद्दे है। यहां गारमेंट फैक्ट्रियों से प्राप्त कपड़ों के अपशिष्ट से गद्दे, कुशन और तकिए तैयार किए जाएंगे।
महिलाओं, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और दिव्यांग युवाओं को भी मिलेगा अवसर
इस इकाई के माध्यम से महिलाओं, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और दिव्यांग युवाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराने की योजना है। इससे रोजगार के अवसरों का विस्तार होने के साथ ही समावेशी आजीविका को बढ़ावा मिलेगा।
अपशिष्ट को उपयोगी उत्पादों में बदलने की यह पहल पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में पार्षद संतोष पात्रे, ललित देवांगन, उद्योग विभाग के महाप्रबंधक हिमालय सेठिया, लाइवलीहुड कॉलेज के प्रभारी अधिकारी पुनेश्वर वर्मा सहित अन्य विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।








