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बंदूक छोड़ सिलाई मशीन थामी, मड्डो उर्फ जरीना बन रहीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

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नक्सल प्रभावित क्षेत्र से मुख्यधारा में लौटीं मड्डो, कोण्डागांव के कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र में सीख रहीं सिलाई का हुनर

आत्मसमर्पण के बाद नई जिंदगी की शुरुआत

ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोण्डागांव। कोण्डागांव, छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र से जुड़ी मड्डो उर्फ जरीना के जीवन में बदलाव की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। कभी कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने वाली मड्डो ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत उन्हें सामान्य जीवन की ओर आगे बढ़ने और सम्मान के साथ जीवनयापन करने का अवसर मिला।

कौशल प्रशिक्षण से आत्मनिर्भर बनने की राह

पुनर्वास कार्यक्रम के अंतर्गत मड्डो को आजीविका के साधन विकसित करने के लिए कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वर्तमान में वे कोण्डागांव स्थित कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र में सिलाई का प्रशिक्षण ले रही हैं। सिलाई का हुनर सीखकर वे अपने लिए रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह तैयार कर रही हैं।

बंदूक छोड़ थामी सिलाई मशीन

मड्डो का यह बदलाव हिंसा से दूर होकर आजीविका और सुरक्षित भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने के प्रयास को दर्शाता है। सिलाई प्रशिक्षण के माध्यम से वे अपने कौशल को विकसित कर रही हैं, ताकि भविष्य में अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।

अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा

मड्डो की कहानी बताती है कि उचित मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और सहयोग मिलने पर व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास के साथ कौशल विकास और रोजगार के अवसर पूर्व में हिंसा से जुड़े रहे लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उनका यह सफर आत्मनिर्भरता, सामाजिक पुनर्वास और बेहतर भविष्य की उम्मीद का संदेश देता है।

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