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न डॉक्टर, न लैब टेक्नीशियन; तीन नर्सों के भरोसे चल रहा बांसकोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र

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10 ग्राम पंचायतों के हजारों ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधा के लिए हैं आश्रित

ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोंडागांवबांसकोट (कोंडागांव), छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के सुदूर अंचल बांसकोट स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) इन दिनों बदहाली और अव्यवस्थाओं का सामना कर रहा है। स्थिति यह है कि स्वास्थ्य केंद्र में नियमित डॉक्टर और लैब टेक्नीशियन नहीं हैं तथा पूरा केंद्र महज तीन नर्सों के भरोसे संचालित हो रहा है।

डॉक्टर नहीं होने से बढ़ी ग्रामीणों की परेशानी

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार बांसकोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर लगभग 10 ग्राम पंचायतों के हजारों लोग स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निर्भर हैं। लेकिन पर्याप्त स्टाफ और विशेषज्ञ सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को इलाज के लिए दूर-दराज के अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य बीमारियों से लेकर गंभीर मरीजों तक को उचित उपचार नहीं मिल पाने के कारण उन्हें मजबूरन 20 से 50 किलोमीटर दूर विश्रामपुरी जाना पड़ता है।

जांच सुविधा के अभाव में गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को दिक्कत

स्वास्थ्य केंद्र में लैब टेक्नीशियन नहीं होने के कारण मरीजों को आवश्यक जांच सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। इसका सबसे ज्यादा असर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों पर पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि केंद्र में कई बार आवश्यक दवाइयों की कमी भी बनी रहती है। जांच और उपचार की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से लोगों को अतिरिक्त खर्च कर दूसरे स्थानों पर जाना पड़ता है।

इमरजेंसी में अस्पताल बंद मिलने की शिकायत

स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि कई बार आपातकालीन स्थिति में अस्पताल बंद मिला है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा। दूरस्थ और आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के कारण समय पर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलना ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

ग्रामीणों ने की डॉक्टर और स्टाफ नियुक्ति की मांग

बांसकोट के उपसरपंच राजेश साहू सहित स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जल्द से जल्द नियमित डॉक्टर, लैब टेक्नीशियन और आवश्यक अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि केंद्र में पर्याप्त स्टाफ और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं तो आसपास के गरीब और आदिवासी ग्रामीणों को अपने गांव के नजदीक ही बेहतर एवं समय पर उपचार मिल सकेगा।

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