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ख़ुशी का अवसर मातम में बदलासड़क दुर्घटना में महिला की दर्दनाक मौत,क्षत विक्षत हुआ शरीर

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दीनदयाल यदु की रिपोर्ट

छुईखदान। दीवाली का त्योहार खुशियों और उल्लास का प्रतीक है, लेकिन ओटेबंद गाँव के जंघेल परिवार के लिए यह दिन एक भयंकर त्रासदी बनकर आया। 28 अक्टूबर, सोमवार को जब परिवार ने दीवाली की खरीदारी के लिए मोटरसाइकिल से खैरागढ़ की ओर यात्रा शुरू की, तब उन्हें शायद ही अंदाजा था कि उनकी जिंदगी में एक ऐसा मंजर सामने आने वाला है, जो उनके खुशहाल जीवन को पल में बिखेर देगा।

चमरू जंघेल और उनकी पत्नी दुर्गा बाई जंघेल छुईखदान होते हुए खैरागढ़ जा रहे थे। उसी दौरान, छुई खदान नाले के पास उनकी बाइक का एक भीषण सड़क हादसा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, खैरागढ़ की दिशा से आ रहे एक ट्रक ने अचानक बाइक सवार महिला को अपनी चपेट में ले लिया। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि वहां एक जानवर का झुंड था और एक चरवाहा भैंस को डंडे से मार रहा था।

भैंस के सड़क पर आ जाने के कारण चमरू और दुर्गा बाई की बाइक उस पर टकरा गई, जिससे वे गिर पड़े।जैसे ही पति-पत्नी सड़क पर गिरे, सामने से आ रहा ट्रक उन्हें चपेट में ले लिया। इस घटना में दुर्गा बाई की मौके पर ही मौत हो गई। उनके पति चमरू गंभीर रूप से घायल हो गए। यह एक ऐसा दृश्य था जिसने वहां मौजूद सभी लोगों का दिल दहला दिया।

उनके परिवार की खुशियों का घर अब मातम का माहौल बन गया था।इस दुखद घटना के बाद, स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर दी, जिससे क्षेत्र में हलचल मच गई। जब पुलिस वहां पहुंची, तो लोगों ने जाम हटाने का निर्णय लिया। इस दुर्घटना ने न केवल जंघेल परिवार को बर्बाद किया, बल्कि स्थानीय लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या सड़कें इतनी खतरे में हैं कि हर दिन हादसों की खबरें सुनाई देती हैं।राजनांदगांव से कवर्धा मार्ग पर सड़क दुर्घटना अब आम हो गए हैं। सड़क की संकरी स्थिति और लापरवाह ड्राइविंग की वजह से दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। यातायात विभाग की नाकामी के कारण इस मार्ग पर सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क पर गति नियंत्रण के लिए कोई उपाय नहीं किया गया है।

इसके कारण उनका आक्रोश दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है।यह घटना यह सवाल उठाती है कि क्या हम सड़क सुरक्षा के प्रति गंभीर हैं? क्या संबंधित विभाग केवल दुर्घटनाओं का सामना करने के लिए इंतजार कर रहा है, या वे हादसों को रोकने के लिए कुछ ठोस कदम उठाएंगे? जब तक सड़क पर सुरक्षा उपाय नहीं होंगे, तब तक ऐसी घटनाएं लगातार होती रहेंगी।

आज, जब पूरा देश दीवाली की रोशनी में डूबा है, ओटेबंद के जंघेल परिवार के लिए यह एक ऐसा दिन है जब अंधेरा छा गया है। उनकी कहानी हमें यह याद दिलाती है कि कभी-कभी खुशी के पल भी किसी गहरे दुख की शुरुआत बन सकते हैं। हम सबको चाहिए कि हम सड़क सुरक्षा के महत्व को समझें और जागरूकता फैलाएं, ताकि आगे से किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

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