ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोण्डागांव। बस्तर, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) बस्तर संभाग परिषद के संयोजक तिलक पांडे ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने की चर्चा का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यूपीआई को देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ और आम जनता के लिए सरल एवं सुविधाजनक भुगतान व्यवस्था के रूप में बढ़ावा दिया गया है। ऐसे में इस पर शुल्क लगाने की तैयारी जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाली होगी।
छोटे दुकानदारों और आम उपभोक्ताओं पर असर की चिंता
तिलक पांडे ने कहा कि यूपीआई के माध्यम से छोटे दुकानदारों, मजदूरों, किसानों, विद्यार्थियों, महिलाओं और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए डिजिटल भुगतान आसान हुआ है। उनके अनुसार, यदि लेनदेन पर शुल्क लगाया जाता है तो इसका प्रभाव छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता के बीच डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क आम नागरिकों की जेब पर नया बोझ बन सकता है। छोटे दुकानदारों के सीमित लाभ पर भी इसका असर पड़ने की आशंका उन्होंने जताई।
सरकार से चार सूत्रीय मांगें
CPI नेता ने केंद्र सरकार से यूपीआई को लेकर चार प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क वापस लिया जाए और आम उपभोक्ताओं तथा छोटे व्यापारियों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क न लिया जाए।
उन्होंने यूपीआई को सार्वभौमिक, निःशुल्क और जनहितकारी भुगतान व्यवस्था के रूप में जारी रखने की मांग की। साथ ही शुल्क से जुड़े किसी भी निर्णय से पहले संसद, उपभोक्ता संगठनों, छोटे व्यापारियों और आम जनता के साथ व्यापक चर्चा करने की बात कही।
जनहित और सामाजिक जवाबदेही पर जोर
तिलक पांडे ने कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली का संचालन निजी मुनाफे के बजाय सार्वजनिक हित और सामाजिक जवाबदेही के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से इस विषय पर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की।
निर्णय वापस नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
CPI बस्तर संभाग परिषद के संयोजक ने कहा कि यदि केंद्र सरकार यूपीआई पर शुल्क लगाने का निर्णय वापस नहीं लेती है, तो पार्टी आम जनता, छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं को साथ लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी।








