देवी-देवताओं को अर्पित किया गया रक्षा सूत्र, सुख-समृद्धि और क्षेत्र की रक्षा की कामना
ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोण्डागांव। कोण्डागांव, रक्षाबंधन पर्व के एक दिन पूर्व 26 अगस्त को कोण्डागांव नगर में वर्षों पुरानी देव राखी परंपरा श्रद्धा और आस्था के साथ निभाई गई। ग्राम पटेल, पुजारी, सिरहा, गायता, माझी और ग्रामीणों की उपस्थिति में नगर के विभिन्न देवी-देवताओं को पारंपरिक रक्षा सूत्र अर्पित कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई।
बसाहट के समय से चली आ रही परंपरा
देव राखी परंपरा के संबंध में देव भगत एवं नगरपालिका अध्यक्ष नरपति पटेल ने बताया कि यह परंपरा कोण्डागांव नगर की बसाहट के समय से चली आ रही है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, जिस प्रकार रक्षाबंधन पर लोग एक-दूसरे को राखी बांधते हैं, उसी प्रकार सबसे पहले अपने आराध्य देवी-देवताओं को रक्षा सूत्र अर्पित करने की परंपरा है।
यह परंपरा प्रकृति, देवी-देवताओं के प्रति आस्था और क्षेत्र की रक्षा की सामूहिक भावना को दर्शाती है। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा में आज भी स्थानीय समुदाय पूरी श्रद्धा के साथ सहभागी बनता है।
नगर के प्रमुख देवी-देवताओं को बांधी गई राखी
देव राखी के तहत सबसे पहले माता गुड़ी, माउली गुड़ी, लालमन कुंवर और भंगाराम सहित बाजार क्षेत्र में स्थापित देवी-देवताओं को रक्षा सूत्र अर्पित किया गया। इसके बाद राम मंदिर, उमराव मंदिर, चौरासी गुड़ी, दंवरी वाले समिया मंदिर और माउली मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर भी देव राखी बांधी गई।
अंत में माता पुजारी सिरहा के स्थान पर देव राखी बांधकर परंपरा को पूर्ण किया गया।
विशेष रूप से तैयार किया जाता है देव राखी का रक्षा सूत्र
देव राखी में उपयोग होने वाला रक्षा सूत्र सामान्य बाजार में मिलने वाली राखी से अलग होता है। इसे गांडा समाज के लोगों द्वारा पारंपरिक तरीके से विशेष रूप से तैयार किया जाता है। इसमें रुई और धागे का उपयोग किया जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार देवी-देवताओं को यही पारंपरिक एवं शुद्ध रक्षा सूत्र अर्पित किया जाता है।
22 पाली के देवी-देवताओं तक पहुंचती है देव राखी
नरपति पटेल ने बताया कि कोण्डागांव क्षेत्र की 22 पाली के देवी-देवताओं के लिए भी देव राखी भेजी जाती है। इस तरह यह परंपरा केवल नगर तक सीमित नहीं रहती, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी आस्था और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करती है।
उन्होंने बताया कि देव राखी के आयोजन की तिथि श्रावण मास की तिथि के अनुसार ग्रामीणों एवं परंपरा से जुड़े लोगों की सहमति से तय की जाती है। रक्षाबंधन से पहले देवी-देवताओं को रक्षा सूत्र अर्पित कर क्षेत्र की रक्षा, शांति और मंगल की कामना की जाती है।
आस्था, संस्कृति और सामुदायिक एकता का प्रतीक
देव राखी की यह परंपरा कोण्डागांव की विशिष्ट लोक-संस्कृति और धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। करीब 700 वर्ष पुरानी बताई जाने वाली यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही है और आज भी ग्रामीणों तथा नगरवासियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती है।
ये रहे उपस्थित
देव राखी कार्यक्रम में माता पुजारी सिरहा श्यामचरण निषाद, ग्राम पटेल कन्हैया लाल कौशिक, देव भगत एवं नगरपालिका अध्यक्ष नरपति पटेल, माटी पुजारी बुधमन कोर्राम, गायता आसमन कोर्राम, ग्राम देहारी साधूराम कोर्राम सहित अन्य ग्रामीण एवं परंपरा से जुड़े लोग उपस्थित रहे।








