पाटन। पाटन विधानसभा क्षेत्र के कौही-सिपकोना नहर निर्माण में कथित घटिया सामग्री के इस्तेमाल और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद भी प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से किसानों में भारी नाराजगी है।
मामले को लेकर खबर प्रकाशित हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन किसानों के मुताबिक अब तक न तो जिला प्रशासन या जल संसाधन विभाग की टीम मौके पर जांच करने पहुंची है और न ही संबंधित ठेकेदार या जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई हुई है।
बारिश में ही उखड़ने लगी सीमेंट की परत
जल संसाधन विभाग द्वारा हाल ही में नहर की पक्की लाइनिंग का कार्य कराया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पहली बारिश और पानी के शुरुआती दबाव में ही कई जगहों पर सीमेंट उखड़ने लगा है और लाइनिंग में दरारें दिखाई देने लगी हैं। किसानों ने निर्माण में सीमेंट-रेत के अनुपात और तराई को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
किसानों को फसल बर्बादी का डर
नहर की कमजोर स्थिति को लेकर आसपास के गांवों के किसान चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि यदि नहर में पूरी क्षमता से पानी छोड़ा गया और लाइनिंग टूट गई तो सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने के साथ खेतों में पानी भरने से फसल को भी नुकसान हो सकता है।
जांच नहीं होने से उठ रहे सवाल
मामला सामने आने के बाद किसानों को उम्मीद थी कि जल संसाधन विभाग तत्काल स्थल निरीक्षण कर निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराएगा। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने से जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
किसानों ने नहर निर्माण की तकनीकी जांच, गुणवत्ता की जांच और दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही नहर की क्षतिग्रस्त लाइनिंग की तत्काल मरम्मत कराने की मांग भी की गई है।
समाचार लिखे जाने तक जल संसाधन विभाग और संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।








