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केशकाल और फरसगांव में एल्डरमैन नियुक्ति क्यों अटकी? बढ़े राजनीतिक सवाल

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बस्तर की अधिकांश नगर निकायों में नियुक्ति पूरी, केशकाल विधानसभा की दो नगर पंचायतें अब भी इंतजार में

ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोंडागांव। कोंडागांव, बस्तर संभाग के अधिकांश नगर निगमों और नगर पंचायतों में राज्य सरकार द्वारा एल्डरमैन नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। नियुक्त सदस्य शपथ लेकर अपने दायित्वों का निर्वहन भी शुरू कर चुके हैं। वहीं, केशकाल विधानसभा क्षेत्र की नगर पंचायत केशकाल और नगर पंचायत फरसगांव में अब तक एल्डरमैन की नियुक्ति नहीं हो सकी है। लगातार हो रही देरी अब प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है।

केवल केशकाल की दो नगर पंचायतें ही क्यों प्रतीक्षा में?

क्षेत्र में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब बस्तर संभाग के अन्य नगरीय निकायों में नियुक्तियां पूरी हो चुकी हैं, तो केवल केशकाल और फरसगांव ही इससे वंचित क्यों हैं। इसे लेकर प्रशासनिक विलंब के साथ-साथ राजनीतिक और संगठनात्मक कारणों को लेकर भी विभिन्न तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

स्थानीय नेतृत्व पर उठ रहे सवाल

एल्डरमैन नियुक्ति में देरी को लेकर सत्ता पक्ष के स्थानीय नेतृत्व की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष इस मुद्दे को भाजपा के स्थानीय नेतृत्व से जोड़ते हुए विधायक तथा भाजपा जिलाध्यक्ष सेवकराम नेताम की राजनीतिक पकड़ पर सवाल खड़े कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि शासन और स्थानीय संगठन के बीच बेहतर समन्वय होता तो नियुक्ति प्रक्रिया समय पर पूरी हो सकती थी।

क्या अंदरूनी खींचतान बन रही वजह?

पिछले कुछ महीनों में केशकाल भाजपा के भीतर सामने आए घटनाक्रमों ने भी इस चर्चा को हवा दी है। नगर पंचायत में पीआईसी सदस्य बनाए जाने को लेकर विवाद, सीएमओ के स्थानांतरण को रोकने की मांग तथा छह भाजपा पार्षदों के प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे जैसी घटनाओं ने संगठन की आंतरिक स्थिति को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि इन घटनाओं और एल्डरमैन नियुक्ति में देरी के बीच किसी आधिकारिक संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।

राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि एल्डरमैन नियुक्ति को लेकर स्थानीय स्तर पर सहमति नहीं बन सकी। सूत्रों के हवाले से अलग-अलग नेताओं की राय और संगठन के भीतर मतभेद की बातें सामने आ रही हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन नियुक्ति में लगातार हो रही देरी से अटकलों का दौर जारी है।

विपक्ष को मिला नया मुद्दा

कांग्रेस इस पूरे मामले को भाजपा की संगठनात्मक कमजोरी बताते हुए सरकार और स्थानीय नेतृत्व पर निशाना साध रही है। विपक्ष का कहना है कि यदि सत्तारूढ़ दल अपने ही नगर निकायों में समय पर एल्डरमैन नियुक्त नहीं करा पा रहा है, तो यह स्थानीय नेतृत्व की प्रभावशीलता पर प्रश्न खड़े करता है।

सरकारी स्पष्टता का इंतजार

अब क्षेत्र की जनता की निगाहें राज्य सरकार और भाजपा संगठन पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि जब तक इस विषय पर आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट नहीं की जाती, तब तक एल्डरमैन नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और अटकलें जारी रहेंगी। सबसे बड़ा सवाल फिलहाल यही है कि केशकाल और फरसगांव नगर पंचायतों में एल्डरमैन की नियुक्ति आखिर कब होगी और देरी का वास्तविक कारण क्या है?

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