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धमधा : ऑपरेशन के बाद महिला की मौत, शव मिला शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज की मर्चुरी में..

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ब्यूरो रिपोर्ट धमधा। श्रेया हॉस्पिटल, धमधा में चिकित्सकीय लापरवाही का गंभीर और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। 55 वर्षीय पदमा देवी का पिछले महीने अस्पताल में ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी, लेकिन मेडिकल प्रबंधन ने न तो परिजनों को जानकारी दी, न ही गंभीर हाल में मरीज को सही तरीके से रेफर किया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि महिला का शव परिवार को जुनवानी स्थित शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज की मर्चुरी में लावारिस हालत में मिला।

मिली जानकारी के अनुसार, 11 अक्टूबर को पदमा देवी को गिरने के बाद श्रेया हॉस्पिटल लाया गया था। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी हड्डी टूट गई है और ऑपरेशन करना पड़ेगा। अगले दिन 12 अक्टूबर को ऑपरेशन किया गया। आरोप है कि 14 अक्टूबर को जब महिला की हालत बिगड़ी तो अस्पताल प्रबंधन ने बिना बताए दो कर्मचारियों के साथ उन्हें एंबुलेंस से शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज भेज दिया।

परिजनों को न इसकी सूचना दी गई और न ही मरीज के स्थानांतरण से संबंधित किसी दस्तावेज की जानकारी दी गई। अगले दिन जब परिवार को किसी तरह इस बात की खबर मिली तो उन्होंने शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज से संपर्क किया। वहां डॉक्टरों ने बताया कि इस नाम की कोई मरीज यहां भर्ती नहीं है।

परिवार ने जब और जानकारी जुटाई तो उन्हें बताया गया कि एक अज्ञात महिला का शव मर्चुरी में रखा गया है। मर्चुरी में शव देखकर परिजन स्तब्ध रह गए—वह शव पदमा देवी का ही था। आरोप है कि श्रेया हॉस्पिटल के कर्मचारी महिला की मौत के बाद मौके से भाग गए थे, जिसके बाद वहां के स्टाफ ने पुलिस को सूचना दी।

इस मामले को लेकर महिला के पुत्र किरंज वर्मा ने 11 नवंबर को सीएमएचओ को लिखित शिकायत दी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर मौत छिपाने और लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायत मिलते ही कलेक्टर ने जांच टीम गठित कर मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने कहा है कि दोषी पाए जाने पर अस्पताल के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

पहले भी सामने आ चुकी है लापरवाही
श्रेया अस्पताल का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 2023 में बेमेतरा निवासी छोटू सेन का इलाज अस्पताल के आयुष डॉक्टरों द्वारा किया गया था, जिसके दौरान उसकी मौत हो गई थी। मामला गंभीर होने पर कलेक्टर ने अस्पताल को एक महीने के लिए बंद कराने का आदेश दिया था।

लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएँ अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। परिवार का कहना है कि यदि सही समय पर जानकारी दी जाती, तो शायद वे अपनी मां की जान बचाने के लिए अन्य उपाय कर सकते थे। उन्होंने मांग की है कि अस्पताल के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो और इस तरह की घटनाओं पर रोक लगे, ताकि किसी अन्य परिवार को ऐसे दर्दनाक अनुभव से न गुजरना पड़े।

मामले की जांच जारी है और प्रशासन अस्पताल की लापरवाही को लेकर सख्त रुख में दिखाई दे रहा है।

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