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धोखाधड़ी की 15 लाख की कहानी कैसे एक महिला ने मासूम गृहिणियों को बनाया शिकार

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दुर्ग ! थाना सुपेला पुलिस ने एक ऐसी शातिर महिला को गिरफ्तार किया है, जो खुद को जरूरतमंद बताकर भोली-भाली घरेलू महिलाओं से लोन दिलवाकर बड़ी ठगी को अंजाम दे रही थी। इस महिला ने पिछले दो महीनों में लगभग 15 लाख रुपए की ठगी की है।

क्या है पूरा मामला?

शुरुआत होती है दुर्ग के नेहरू नगर क्षेत्र की एक कॉलोनी से, जहां की महिलाएं आमतौर पर घरेलू कामों में व्यस्त रहती थीं। इन्हीं महिलाओं को नेमा गोस्वामी नाम की महिला ने अपने झूठे जाल में फँसाया। वह खुद को बीमार, जरूरतमंद और परिवार की जिम्मेदारियों से लदी बताकर सहानुभूति बटोरती थी।

नेमा उन्हें कहती
“मेरे पास कागज पूरे हैं, तुम्हें कुछ नहीं करना पड़ेगा, मैं खुद किश्तें चुकाऊंगी। बस तुम लोन दिलवा दो…”
और महिलाएं उसके झांसे में आ जातीं।

कहाँ-कहाँ से लिया लोन?

नेमा गोस्वामी ने जिन बैंकों और वित्तीय संस्थाओं से ठगी को अंजाम दिया उनमें शामिल हैं:

नेबफिन्स लिमिटेड बैंक

उज्जीवन बैंक (ग्रीन चौक दुर्ग)

स्वस्ति बैंक

बंधन बैंक (नेहरू नगर)

आशीर्वाद बैंक

बेल स्टार बैंक (कोसा नगर)

स्पंदन स्फूर्ती फाइनेंशियल लिमिटेड (कैलाश नगर)

एक्टिटोश बैंक

आईडीएफसी बैंक (उतई)

मुथूट फाइनेंस कंपनी (केलाबाड़ी, दुर्ग)


कैसे हुआ खुलासा?

प्रार्थिया पूर्णिमा चौहान ने थाना सुपेला में लिखित आवेदन दिया, जिसमें उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे नेमा ने उनकी और अन्य महिलाओं की सहानुभूति लेकर लोन दिलवाया और रकम हड़प ली। थाना सुपेला की पुलिस ने मामला अपराध क्रमांक 853/25 धारा 318(4) बीएनएस के तहत दर्ज कर जांच शुरू की।

सूचना के आधार पर नेमा गोस्वामी को रायपुर के मंगल बाजार से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने अपना गुनाह कबूलते हुए बताया कि उसने बीते दो महीनों में लगभग 15 लाख रुपये की ठगी की है।

कौन है नेमा गोस्वामी?

नाम: श्रीमती नेमा गोस्वामी

पति का नाम: ईश्वरी गोस्वामी

उम्र: 55 वर्ष

मूल पता: रेश्ने आवास, नेहरू नगर वार्ड क्रमांक 05, थाना सुपेला, जिला दुर्ग

वर्तमान निवास: मंगल बाजार, थाना आजाद चौक, रायपुर


पुलिस की टीम रही सक्रिय

इस महत्वपूर्ण कार्रवाई में थाना प्रभारी सुपेला निरीक्षक विजय यादव, उनि चितराम ठाकुर, प्र.आर. सुबोध पांडेय, आरक्षक राजु राणा, दुर्गेश सिंह राजपूत, और महिला आरक्षक ममता वासनिक की अहम भूमिका रही।



यह मामला एक कड़ा संदेश है – वित्तीय मदद या लोन से जुड़ी कोई भी जानकारी साझा करने से पहले सावधान रहें और पूरी जांच-पड़ताल करें। जरूरतमंद की पहचान करना जरूरी है, वरना एक झूठी कहानी आपके वर्षों की कमाई को निगल सकती है।

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