बलौदा बाजार से जितेंद्र पांडे
बलौदाबाजार, कसडोल:विकासखंड कसडोल के शासकीय आदर्श प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास, ग्राम बया में जारी अराजकता और लापरवाही ने वनांचल क्षेत्र के पालकों और छात्रों की उम्मीदों को तार-तार कर दिया है। बच्चों के भविष्य को लेकर गम्भीर माने जाने वाले इस छात्रावास में प्रभारी अधीक्षक श्यामलाल ध्रुव की कार्यशैली ने शिक्षा के उद्देश्य को ही मजाक बना दिया है।
छात्रावास बना असामाजिक गतिविधियों का अड्डा
छात्रावास के अंदर गुटखा, बीड़ी, शराब, डिस्पोजल चखना जैसी वस्तुएं खुलेआम पड़ी मिलीं। प्रवेश द्वार से लेकर बाथरूम तक गंदगी, गुटखा थूक, बीड़ी के पैकेट और गुड़ाखू के डिब्बे बिखरे पड़े थे। शौचालय और स्नानागार वर्षों से साफ नहीं हुए, पानी की कोई व्यवस्था नहीं।
बच्चों को न भोजन, न फर्नीचर, न पढ़ाई की सुविधा
छात्रावास में न ब्लैकबोर्ड है, न फर्नीचर, न पढ़ाई का माहौल। बच्चों के भोजन के लिए चावल तक नहीं, रसोइया नहीं आता। कुल चार अन्य कर्मचारी मौजूद हैं लेकिन वे भी अधीक्षक के नक्शे कदम पर चलते हुए मनमानी करते हैं।
प्रभारी अधीक्षक का दोहरा चेहरा
जब मीडिया ने अधीक्षक श्यामलाल ध्रुव से व्यवस्था पर सवाल पूछे, तो उन्होंने सभी सुविधाएं उपलब्ध होने का झूठा दावा किया। लेकिन जमीनी सच्चाई बिल्कुल उलट निकली यह छात्रावास शिक्षा का मंदिर नहीं, बल्कि बदहाली और अव्यवस्था का नमूना बन चुका है।
प्रशासन से सवाल – कब होगी सख्त कार्रवाई?
क्या आदिवासी बच्चों के जीवन से खिलवाड़ करने वाले ऐसे अधीक्षकों पर बर्खास्तगी जैसी कठोर कार्रवाई होगी?
क्या चार अन्य कर्मचारी जो मौन रहकर इस भ्रष्टाचार में सहभागी बने हैं, उन पर भी कार्रवाई होगी?
कब तक शासन की योजनाओं को ऐसे लापरवाह अधिकारी पलीता लगाते रहेंगे?
छत्तीसगढ़ सरकार एवं आदिवासी विकास विभाग से हम क्षेत्रवासी आग्रह करते है कि बलौदाबाजार जिले के छात्रावास बया की स्थिति को तत्काल संज्ञान मे लें और जिम्मेदार कर्मचारियों को निलंबित नहीं,बल्कि सीधे बर्खास्त किया जाए।
निष्कर्ष:
वनांचल के छात्रों को अवसर देना सरकार का उद्देश्य है, लेकिन अधीक्षक श्यामलाल ध्रुव जैसे अधिकारी उस उद्देश्य की हत्या कर रहे हैं। ऐसे में अब चुप रहना आदिवासी बच्चों के साथ अन्याय होगा।
वनांचल क्षेत्र बया के छात्रावास में लापरवाही की पराकाष्ठा: सुस्त अधीक्षक और भ्रष्ट सिस्टम के बीच बर्बाद होता आदिवासी बच्चों का भविष्य








