Buy Advt. Space

बिना कृषि भूमि के बना “किसान मित्र”, सचिव की मनमानी से ग्रामीण आक्रोशित

By

गरियाबंद से दिव्यांश पटेल की रिपोर्ट

गरियाबंद, आमदी – सरकार जहां एक ओर किसानों की भलाई और योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए हर स्तर पर अधिकारी-कर्मचारियों की नियुक्ति कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्ति इन योजनाओं को पंगु बनाने में लगे हैं।

ऐसा ही एक गंभीर मामला गरियाबंद जिले के ग्राम आमदी में सामने आया है, जहां पदस्थ सचिव होरीलाल शर्मा द्वारा पूरी प्रक्रिया और नियमों को दरकिनार कर एक ऐसे व्यक्ति को “किसान मित्र” नियुक्त कर दिया गया, जिसके नाम गांव में कोई भी कृषि भूमि तक नहीं है।

सूत्रों के अनुसार, अनूप चक्रधारी जो उस समय पंचायत में चपरासी के पद पर कार्यरत था, उसे किसान मित्र बना दिया गया। स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि अनूप का खेती-किसानी से कोई वास्ता नहीं है, न ही वह किसी योजना में खाद, बीज या उपकरण का वितरण करता है। उल्टा जो भी सामग्री आती है, वह निजी उपयोग में ले ली जाती है।

जब इस संबंध में ग्रामीणों ने सचिव से जानकारी मांगी, तो उन्होंने जवाब देने की बजाय धमकी देते हुए कहा – “RTI लगाओ, ऑनलाइन देख लो… ज्यादा बोले तो सरकारी काम में बाधा बताकर अंदर कर दूंगा।” इतना ही नहीं, पिछले साल ग्रामीणों द्वारा जनपद पंचायत गरियाबंद में की गई शिकायत के बाद, सचिव ने पलटकर ग्रामीणों के खिलाफ ही थाना में शिकायत दर्ज करा दी।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान किसान मित्र के चयन में न तो पंचायत स्तर पर कोई बैठक हुई, न ही किसानों से सलाह ली गई। यह पूरी प्रक्रिया एकतरफा और मनमानी तरीके से की गई, जिससे साफ प्रतीत होता है कि सचिव अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं।

अब सवाल उठता है – क्या सरकार की किसान योजनाएं सिर्फ कागजों में ही चलेंगी? क्या मनमानी करने वाले सचिवों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी?

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही पात्र व्यक्तियों तक पहुंचे और व्यवस्था में लोगों का विश्वास बना रहे।

Leave a Comment