ब्यूरो रिपोर्ट
पूरा मामला कुछ यूं है – आधी रात के सन्नाटे में, जब अच्छे लोग खर्राटे मार रहे थे और कुत्ते तक ऊंघ रहे थे, तभी चार शातिर चोरों की एक टीम ‘मिशन केबल’ पर निकल पड़ी। इनका टारगेट था – पलक इंडस्ट्रीज, नाम सुनकर ही ऐसा लग रहा था कि पलक झपकते ही सब गायब हो जाएगा… और वाकई में यही हुआ।

रात के लगभग 1:30 बजे, ये चारों उस्ताद – छत्रपाल बारले, हरीचन्द्र साहू, महेश साहू और राहुल यादव – ई-रिक्शा में सवार होकर कंपनी पहुंचे। अब सोचिए, जहां बाकी चोर बाईक, स्कूटी या कार से चोरी करने जाते हैं, वहीं ये चोर ई-रिक्शा लेकर चोरी करने निकले। मतलब पर्यावरण के प्रति इतनी निष्ठा कि चोरी भी ग्रीन एनर्जी से करेंगे। ऐसे “ईको-फ्रेंडली चोर” कम ही देखने मिलते हैं।
इनका निशाना था – कॉपर केबल वायर, जिसकी लंबाई 300 से 400 मीटर और कीमत करीब ₹40,000 थी। इतने तार चुराए कि अगर जोड़ दो, तो भिलाई से दिल्ली तक बात की जा सकती है बिना नेटवर्क डाउन हुए!
अब आते हैं असली मजेदार हिस्से पर – पकड़े कैसे गए?
जामुल पुलिस को जैसे ही इस चोरी की भनक लगी, थाना प्रभारी राजेश मिश्रा जी के दिमाग की बत्ती जल उठी। CCTV फुटेज खंगाले गए, और कैमरे में जो दिखा, वो किसी बॉलीवुड मूवी के क्लाइमेक्स जैसा था – ई-रिक्शा में चार चोर लटकते हुए, कॉपर केबल को खींचते हुए जा रहे थे!
पुलिस ने सबसे पहले संदेही छत्रपाल बारले को दबोचा। पूछताछ शुरू हुई तो साहब ने कुछ मिनटों में ऐसा सब कुछ उगल दिया जैसे मिर्ची लगी हो – बताया कि उसके साथ उसके परम मित्र हरीचन्द्र, महेश और राहुल भी थे। सभी ने मिलकर चोरी की, और गजब बात ये कि चोरी की सामग्री उनके घर पर सजाकर रखी थी – मतलब इतना कॉन्फिडेंस कि पकड़ाएंगे ही नहीं!
बरामद क्या हुआ?
पुलिस ने 300-400 मीटर कॉपर वायर (₹40,000 की कीमत का) और वो ई-रिक्शा भी जब्त कर लिया जिसमें ये “केबल एक्सप्रेस” चल रही थी, जिसकी कीमत ₹1,00,000 आंकी गई। अब ये रिक्शा न्यायालय के सामने पेश होगा – शायद भारत का पहला ई-रिक्शा होगा जो “गवाह” के तौर पर खड़ा होगा।
अब बात करते हैं आरोपियों की पृष्ठभूमि की –
ये कोई सामान्य मोहल्ले वाले चोर नहीं हैं, साहब।
छत्रपाल पर पहले से हत्या का प्रयास, बलात्कार और मारपीट के केस दर्ज हैं – यानी एक ही इंसान में पूरी क्राइम की किताब समाई है।
राहुल यादव पर हत्या का मामला दर्ज है – चोरी करना तो इनके लिए “वॉर्म-अप” जैसा है।
हरीचन्द्र पर भी मारपीट का केस दर्ज है – यानी ये चारों “क्राइम यूनिवर्स” के चार पिलर हैं।
पुलिस को बधाई दी जानी चाहिए कि उसने इतनी जल्दी इन शातिरों को पकड़ लिया, वरना अगला मिशन शायद रेलवे की पटरी उखाड़ने का होता या बिजली विभाग का ट्रांसफार्मर गायब करने का।
इस ‘गजब चोरी कांड’ में इन जांबाज पुलिसकर्मियों की रही विशेष भूमिका –
निरीक्षक राजेश मिश्रा,
उनि सौमित्री भोई,
सउनि राजेन्द्र देशमुख,
आरक्षक रूपनारायण बाजपेयी,
चन्द्रभान यादव एवं अतुल सिंह – सभी को हमारी तरफ से “सुपर कॉपर ब्रावो अवार्ड” मिलना चाहिए।








