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CG: खैरागढ़ के एकमात्र शासकीय इंग्लिश मीडियम स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी, अभिभावक परेशान

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खैरागढ़ से रवि गहने की रिपोर्ट

खैरागढ़। क्षेत्र की एकमात्र शासकीय आंग्ल माध्यमिक विद्यालय इंग्लिश मीडियम सीबीएसई – इंग्नाइट इन दिनों गंभीर शिक्षक संकट से गुजर रहा है। शिक्षकों की भारी कमी के चलते विद्यालय में पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। पालक संघ ने प्रशासन से दो विषय शिक्षकों की शीघ्र नियुक्ति की माँग की है।

विद्यालय में संकट की स्थिति
इस विद्यालय में पिछले सत्र में 124 छात्र पंजीकृत थे और इस सत्र में भी संख्या इतनी ही रहने की संभावना है। लेकिन वर्तमान में केवल तीन शिक्षक कार्यरत हैं—एक प्रधानपाठक, एक संस्कृत शिक्षक और एक विज्ञान शिक्षक, जो फिलहाल गंभीर बीमारी के कारण मेडिकल अवकाश पर हैं। अंग्रेजी विषय की शिक्षिका का स्थानांतरण पहले ही हो चुका है। नतीजतन, अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं ठप पड़ी हैं।

पालकों की चिंता बढ़ी
विद्यालय में शिक्षकीय व्यवस्था न्यूनतम स्तर पर भी नहीं है, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर गहरा असर पड़ रहा है। पालकों ने कहा कि यदि गणित और विज्ञान विषय के लिए शिक्षकों की तत्काल व्यवस्था नहीं की गई, तो विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य संकट में पड़ सकता है।

प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
पालक संघ अध्यक्ष संदीप सिरमौर के नेतृत्व में पालकों ने जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए दो शिक्षकों की तात्कालिक अस्थायी नियुक्ति की माँग की। उन्होंने अपील की कि जब तक नियमित नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था की जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।

सरकारी प्राथमिकता पर सवाल
अभिभावकों ने सवाल उठाया कि सरकार जहाँ एक ओर शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों को बढ़ावा देने की बात कर रही है, वहीं ज़मीनी स्तर पर हालात विपरीत हैं। अगर शिक्षक नहीं होंगे, तो सरकार की योजनाएँ केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी।

निजी स्कूलों की मजबूरी
पालकों का कहना है कि यदि सरकार ने शीघ्र पहल नहीं की, तो उन्हें बच्चों को निजी विद्यालयों में भेजने पर मजबूर होना पड़ेगा। लेकिन यह विकल्प सभी के सामर्थ्य में नहीं है। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

ज्ञापन सौंपने वालों में शामिल थे
ज्ञापन सौंपते समय पालकगण विजय तोड़े, चरेंद्र साहू, हरी साहू, लोकेश साहू सहित अन्य अभिभावक और विधायक प्रतिनिधि मनराखन देवांगन उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में प्रशासन से निवेदन किया कि स्कूल की महत्ता और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शीघ्र निर्णय लिया जाए।

निष्कर्ष
शिक्षकों की कमी से जूझ रहे इस सरकारी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय की स्थिति बेहद चिंताजनक है। प्रशासन की ओर से शीघ्र ठोस कदम न उठाए जाने की स्थिति में छात्रों का भविष्य दांव पर लग सकता है। पालकों की माँगें स्पष्ट और तात्कालिक हैं—दो विषय शिक्षकों की अस्थायी व्यवस्था। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर शैक्षणिक संकट को कितनी तत्परता से सुलझाता है।

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