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जल जीवन मिशन: मेंडपाल गांव बना हर घर जल प्रमाणित गांव

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कोण्डागांव से बन्नूराम यादव की रिपोर्ट

कोंडागांव ! जिले से लगभग 27 किलोमीटर दूर बसा छोटा-सा ग्राम मेंडपाल आज जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक मिसाल बन चुका है। कभी जहां गांव की महिलाएं किलोमीटरों दूर तालाब और हैंडपंप से पानी भरने के लिए जाती थीं, आज उसी गांव के हर घर में नल से स्वच्छ जल उपलब्ध है। यह परिवर्तन जल जीवन मिशन के सफल क्रियान्वयन और ग्रामवासियों की मजबूत जनभागीदारी का परिणाम है।पहले पानी की किल्लत न केवल महिलाओं की दिनचर्या को प्रभावित करती थी, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती थी।जल जीवन मिशन के अंतर्गत हुए इस परिवर्तन से न केवल महिलाओं को बड़ी राहत मिली है, बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आया है। अब महिलाएं घर के अन्य कार्यों पर ध्यान दे पा रही हैं, बच्चे समय पर स्कूल पहुंच पा रहे हैं और बुजुर्गों को दूर-दराज पानी ढोने की कठिनाइयों से मुक्ति मिली है।ग्राम मेंडपाल में फूलमती, ललिता, सुनीता, सावित्री और केसरी जैसी महिलाएं ‘जल वाहिनी’ के रूप में सक्रिय हैं। ये महिलाएं न केवल जल की गुणवत्ता की जांच करती हैं बल्कि स्वच्छता, जल संरक्षण और जल जनित बीमारियों से बचाव के प्रति गांव को निरंतर जागरूक भी कर रही हैं। जल जीवन मिशन ने महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया है, जिससे वे अब समाज के विकास में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।

ग्राम मेंडपाल की एक विशेषता यह भी है कि जल आपूर्ति प्रणाली का संचालन और रखरखाव स्वयं ग्रामवासियों के द्वारा किया जा रहा है। हर महीने प्रत्येक घर से जल शुल्क एकत्र कर योजनाबद्ध ढंग से इस व्यवस्था को स्थायी बनाया गया है। इससे न केवल सिस्टम की मजबूती बनी है, बल्कि आत्मनिर्भरता और सामुदायिक स्वामित्व की भावना भी गहरी हुई है।ग्राम के सरपंच बताते हैं, पानी की टंकी स्थापित होने के बाद गांव में जल संकट का समाधान हुआ है। पहले पानी हैंडपंप से मिलता था, जो दूर था और गर्मी में जल स्तर गिरने के कारण समस्याएं और बढ़ जाती थीं। लेकिन अब नल जल योजना का लाभ हर घर तक पहुंच रहा है। समय की बचत हो रही है और जल को लेकर गांव की आत्मनिर्भरता और जनभागीदारी ने मेंडपाल को ‘हर घर जल’ प्रमाणित बना दिया है।ग्राम मेंडपाल का यह परिवर्तन केवल बुनियादी सुविधाओं के विकास की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सोच का भी प्रतीक है जिसमें सरकार की योजनाओं को तभी सच्ची सफलता मिलती है जब समुदाय स्वयं उसे अपनाता और उसका संचालन करता है। आत्मनिर्भरता और जनभागीदारी के इस उत्कृष्ट उदाहरण ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब इरादे मजबूत होते हैं, तो विकास खुद ब खुद रास्ता बना लेता है।

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