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पटवारियों की हड़ताल पर मोहन मरकाम का सरकार पर हमला, बोले- 100 साल पुराने नक्शों के भरोसे राजस्व व्यवस्था

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ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोंडागांव। कोंडागांव, छत्तीसगढ़ में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल और राजस्व कार्यों में आ रही परेशानियों को लेकर पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कांग्रेस नेता मोहन मरकाम ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कोंडागांव जिले की राजस्व व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी जिले में वर्ष 1924-25 के पुराने राजस्व नक्शों के आधार पर कामकाज किया जा रहा है। सरकार डिजिटल इंडिया और सुशासन की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर राजस्व व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर पटवारी

मोहन मरकाम ने कहा कि राजस्व पटवारी संघ के आह्वान पर प्रदेशभर के पटवारी 13 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। PV App की तकनीकी एवं व्यावहारिक समस्याओं, वेतन विसंगति, लंबित पदोन्नति सहित अन्य मांगों को लेकर पटवारी आंदोलन कर रहे हैं।

हड़ताल के कारण डिजिटल क्रॉप सर्वे, किसान पंजीयन, धान पंजीयन, फौती नामांतरण और आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण राजस्व कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसका सीधा असर किसानों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आम जनता की परेशानियों को देखते हुए सरकार को पटवारियों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

1924-25 के नक्शों के आधार पर चल रही राजस्व व्यवस्था

मरकाम ने कहा कि कोंडागांव जिले में वर्ष 1924-25 के बाद आज तक नया राजस्व सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त नहीं कराया गया है। तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 10 मार्च 2023 को जिले के सभी गांवों में राजस्व सर्वेक्षण कराने के लिए राजपत्र प्रकाशित किया गया था, लेकिन अब तक केवल एक गांव में प्रयोग के तौर पर सर्वेक्षण किया गया है। इसकी आगे की प्रक्रिया भी लंबित है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब जिले में राजस्व रिकॉर्ड और नक्शे ही पुराने हैं, तो आधुनिक डिजिटल व्यवस्था लागू करने से पहले उन्हें दुरुस्त क्यों नहीं किया जा रहा है?

नक्शा बंटांकन 29 प्रतिशत, डिजिटल क्रॉप सर्वे भी अधूरा

पटवारी संघ के आंकड़ों का हवाला देते हुए मोहन मरकाम ने बताया कि जिले में नक्शा बंटांकन का कार्य लगभग 29 प्रतिशत ही हुआ है, जबकि डिजिटल क्रॉप सर्वे में फसल प्रविष्टि की प्रगति 20 प्रतिशत से भी कम बताई जा रही है।

ऐसी स्थिति में पटवारियों पर शत-प्रतिशत डिजिटल सर्वे पूरा करने का दबाव बनाना अव्यावहारिक है। उन्होंने कहा कि जब जमीन का नक्शा ही सही नहीं है, तो PV App के माध्यम से डिजिटल सर्वे किस आधार पर कराया जा रहा है? तकनीकी खामियों के कारण भविष्य में जमीन संबंधी विवाद उत्पन्न होते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

पटवारियों से बातचीत कर मांगों का समाधान करे सरकार

मोहन मरकाम ने भाजपा सरकार से मांग की कि पटवारियों के साथ तत्काल बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए। साथ ही पटवारियों पर की जा रही दंडात्मक कार्रवाई वापस लेने और कोंडागांव जिले में नए राजस्व सर्वेक्षण का कार्य शीघ्र शुरू कराने की पहल की जाए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसानों, कर्मचारियों और आम जनता के अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ खड़ी है। सरकार को बताना चाहिए कि कोंडागांव की जनता को 100 साल पुराने राजस्व रिकॉर्ड के भरोसे आखिर कब तक रखा जाएगा?

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