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बस्तर मुन्ने कार्यक्रम से चमेली कुंजाम को मिला शिक्षा का नया अवसर

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पालक नहीं होने से छूटी थी पढ़ाई, जिला प्रशासन की पहल से एकलव्य विद्यालय में मिला प्रवेश

ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोण्डागांवकोण्डागांव, ग्राम चनियागांव, तहसील धनोरा निवासी बालिका चमेली कुंजाम के जीवन में जिला प्रशासन की पहल ने शिक्षा की नई उम्मीद जगाई है। कक्षा 6वीं तक अध्ययन करने वाली चमेली की आगे की पढ़ाई दोनों पालकों के नहीं होने और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण रुक गई थी।

दस्तावेजों के अभाव में रुकी थी शिक्षा

चमेली कुंजाम का जाति एवं निवास प्रमाण पत्र नहीं बन पाने के कारण उसे आगे की शिक्षा जारी रखने में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में उसकी पढ़ाई आगे नहीं बढ़ पा रही थी।

पत्रकार के माध्यम से प्रशासन तक पहुंची जानकारी

इस संबंध में स्थानीय पत्रकार के माध्यम से जिला प्रशासन को बालिका की स्थिति की जानकारी प्राप्त हुई। मामले की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने संवेदनशीलता के साथ तत्काल पहल की।

बस्तर मुन्ने कार्यक्रम के तहत हुई त्वरित कार्रवाई

कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना के मार्गदर्शन में केशकाल एसडीएम आकांक्षा नायक द्वारा बस्तर मुन्ने कार्यक्रम के तहत आवश्यक कार्रवाई की गई। बालिका का जाति एवं निवास प्रमाण पत्र तैयार कराकर उसे उपलब्ध कराया गया।

एकलव्य आवासीय विद्यालय में मिला प्रवेश

चमेली की आगे की शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उसका एकलव्य आवासीय विद्यालय, बेड़मा में कक्षा 7वीं में प्रवेश कराया गया।

फिर शुरू हुआ शिक्षा का सफर

जिला प्रशासन की इस पहल से चमेली कुंजाम को अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू करने का अवसर मिला है। अब वह आवासीय विद्यालय में रहकर नियमित रूप से शिक्षा प्राप्त कर सकेगी और अपने बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ सकेगी।

बस्तर मुन्ने कार्यक्रम के माध्यम से जिला प्रशासन की यह पहल जरूरतमंद बच्चों तक शिक्षा और आवश्यक सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है।

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