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कोंडागांव में फुले जयंती पर चौक नामकरण समारोह आयोजित

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ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोंडागांव । महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा राव फुले की जयंती के अवसर पर कोंडागांव नगर में श्रद्धा और उत्साह के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर कनेरा रोड स्थित दैनिक सब्जी पसारा क्षेत्र में महात्मा ज्योतिबा राव फुले एवं सावित्रीबाई फुले चौक का स्थापना एवं नामकरण किया गया।

सर्व समाज की सहभागिता से आयोजित हुआ कार्यक्रम

कार्यक्रम का आयोजन सर्व अनुसूचित जाति वर्ग, जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं धार्मिक अल्पसंख्यक समाज, जिला कोंडागांव द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष धंसराज टंडन ने की। बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित होकर जयंती समारोह में शामिल हुए।

दीप प्रज्वलन कर किया गया स्मरण

समारोह के दौरान उपस्थित पदाधिकारियों एवं समाज के वरिष्ठजनों ने महात्मा फुले के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने उनके जीवन संघर्ष और समाज सुधार के कार्यों को याद करते हुए उनके विचारों को अपनाने का संदेश दिया।

सामाजिक न्याय के महान योद्धा थे फुले

वक्ताओं ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले केवल समाज सुधारक ही नहीं, बल्कि दलितों, पिछड़ों और महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले महान योद्धा थे। उनका जीवन अन्याय, भेदभाव और अज्ञानता के खिलाफ समर्पित रहा।

सावित्रीबाई फुले के योगदान को भी किया याद

इस अवसर पर माता सावित्रीबाई फुले के योगदान को भी विशेष रूप से याद किया गया। उन्हें भारत की प्रथम महिला शिक्षिका बताते हुए बालिका शिक्षा के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक कार्यों को सराहा गया।

चौक नामकरण से मिलेगी प्रेरणा

कार्यक्रम में निर्णय लेते हुए कोंडागांव के प्रमुख चौराहे का नामकरण महात्मा ज्योतिबा राव फुले एवं सावित्रीबाई फुले चौक के रूप में किया गया। उपस्थित लोगों ने कहा कि यह चौक आने वाली पीढ़ियों को सामाजिक न्याय और शिक्षा के प्रति प्रेरित करेगा।

ये रहे प्रमुख रूप से उपस्थित

कार्यक्रम में वरिष्ठ पदाधिकारी सी.एल. मेश्राम, प्रेम सिंह नाग, एम.डी. बघेल, पी.एल. ठाकरे, रमाकांत महाजन, बजरंग कुलदीप, प्रदीप सागर, बुद्धूराम नाग, मंसाराम, चवन वर्मा, तरुण नाग, श्रीमती पटेल, लखराज टंडन, श्री पाटिल सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई जयंती

समारोह में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी ने इसे एकता और सम्मान का प्रतीक बना दिया। सभी ने महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

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