डॉ. रमन सिंह ने किया शिलान्यास, दो वर्षों में होगा श्री श्री राधा गिरिधारी मंदिर का निर्माण
ब्यूरो नूतन साहू गरियाबंद।जिला मुख्यालय गरियाबंद में भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का नया केंद्र बनने जा रहे श्री श्री राधा गिरिधारी (इस्कॉन) मंदिर का सोमवार को विधिवत भूमिपूजन संपन्न हुआ। लगभग 15 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस भव्य मंदिर का शिलान्यास विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच किया।
वैदिक अनुष्ठान और संकीर्तन से गूंजा परिसर
भूमिपूजन से पूर्व इस्कॉन छत्तीसगढ़ के प्रमुख परम पूज्य भक्ति सिद्धार्थ स्वामी महाराज की उपस्थिति में वैष्णव होम, वास्तु पूजा एवं विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इसके पश्चात इस्कॉन एवं स्थानीय कलाकारों द्वारा भावपूर्ण कृष्ण भजन और संकीर्तन की प्रस्तुति दी गई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
मिश्रा परिवार का बड़ा योगदान
उल्लेखनीय है कि मंदिर निर्माण हेतु गरियाबंद के नीरज मिश्रा परिवार द्वारा 4 एकड़ भूमि एवं 1 करोड़ रुपए की राशि प्रदान की गई है। इस सहयोग की उपस्थित अतिथियों ने मुक्त कंठ से सराहना की।
जनप्रतिनिधियों ने जताई प्रसन्नता
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. रमन सिंह ने कहा कि इस्कॉन संस्था ने विश्व स्तर पर भारतीय संस्कृति और कृष्ण भक्ति को पहचान दिलाई है। गरियाबंद में बनने वाला यह मंदिर आस्था, संस्कृति और नैतिक मूल्यों का केंद्र बनेगा।
महासमुंद सांसद रूप कुमारी चौधरी, राजिम विधायक रोहित साहू एवं महासमुंद विधायक योगेश्वर सिन्हा ने भी मंदिर निर्माण को क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक पहल बताया।
मंदिर की विशेषताएं और रोजगार की संभावना
प्रस्तावित इस्कॉन मंदिर का शिखर 51 फीट ऊंचा होगा। परिसर में मुख्य गर्भगृह, सत्संग एवं प्रवचन हॉल, गोशाला, अतिथि भवन, गीता अध्ययन केंद्र, पुस्तक स्टॉल और पार्किंग जैसी सुविधाएं होंगी। मंदिर के पूर्ण होने के बाद स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
श्रद्धालुओं की रही बड़ी सहभागिता
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ फिल्म निगम अध्यक्ष मोना सेन, नगर पालिका अध्यक्ष रिखीराम यादव, पूर्व विधायकगण, जनप्रतिनिधि, साधु-संत, कलेक्टर बी.एस. उइके, पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
दो वर्षों में पूर्ण होने वाला श्री श्री राधा गिरिधारी (इस्कॉन) मंदिर गरियाबंद को धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगा।








