पितेश्वर हरपाल गरियाबंद/छुरा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जनता की सुविधा के लिए खर्च किए गए लाखों रुपये आज सरकारी लापरवाही की भेंट चढ़ते नजर आ रहे हैं। छुरा ब्लॉक में स्वच्छता उद्देश्यों के लिए उपलब्ध कराए गए चलित शौचालय की हालत आज इतनी खराब हो चुकी है कि वह उपयोग के बजाय जंगलनुमा इलाके में कबाड़ बनकर पड़ा हुआ है। यह स्थिति प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
जनता के लिए खरीदा गया शौचालय, आज झाड़ियों में कबाड़
यह वही चलित शौचालय है जो तीन वर्ष पूर्व पूर्व मुख्यमंत्री के छुरा नगर आगमन पर आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए रावनाभाठा में उपयोग किया गया था। कार्यक्रम के बाद इसे न तो सुरक्षित स्थान पर भेजा गया और न ही रखरखाव की कोई व्यवस्था की गई।
परिणाम
शौचालय पूरी तरह जर्जर
दरवाजा और छत चोरी
भीतर का ढांचा टुटा
चारों ओर घनी झाड़ियां
आज यह शौचालय किसी उपयोग लायक भी नहीं बचा।
जनपद पंचायत जिम्मेदार, लेकिन लापरवाही चरम पर
नियमों के मुताबिक चलित शौचालय की देखरेख और संरक्षण की जिम्मेदारी जनपद पंचायत छुरा की थी, लेकिन:
🔸 न निगरानी
🔸 न मरम्मत
🔸 न कोई जवाबदेही
अब सवाल उठता है
क्या प्रशासन को इसकी हालत की जानकारी नहीं?
क्या लाखों की सरकारी संपत्ति बेकार होने से किसी को फर्क नहीं पड़ता?
इस नुकसान की जवाबदेही किस पर तय होगी?
स्वच्छता अभियान के दावे खोखले?
सरकार स्वच्छता अभियान को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी सच्चाई शर्मनाक तस्वीर पेश कर रही है। यदि रखरखाव सही तरीके से होता तो यह चलित शौचालय आज मेलों, सार्वजनिक समारोहों और आपात स्थितियों में जनता के उपयोग में आता।
लोगों में रोष, जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह सरकारी संसाधनों की बर्बादी से जनता का विश्वास विकास योजनाओं से उठता जा रहा है। लोग मांग कर रहे हैं
मामले की उच्चस्तरीय जांच हो
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो
भविष्य में ऐसी लापरवाही न दोहराई जाए
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में जवाबदेही तय करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दफ्न होकर रह जाएगा।
क्राइम; छुरा में चलित शौचालय कबाड़ बना, स्वच्छता पर प्रशासन की बड़ी लापरवाही








