पितेश्वर हरपाल गरियाबंद/छुरा। छुरा थाना क्षेत्र अंतर्गत वनांचल ग्राम सेहरापानी की तीन वर्ष पूर्व हुई गुमशुदगी का मामला आज भी रहस्य बना हुआ है। जिस महिला को एक लापता लड़की की खोज में चेन्नई भेजा गया था, वह खुद गुमशुदगी की रहस्यमयी कहानी बन गई। तीन साल बाद भी उसका कोई पता नहीं चल पाया है, जिससे परिवार और ग्रामीण प्रशासनिक खोजबीन पर सवाल उठा रहे हैं।
लड़की की तलाश में चेन्नई गई महिला खुद लापता

ग्राम सेहरापानी में तीन वर्ष पहले एक लड़की अचानक लापता हो गई थी। लंबे समय तक स्थानीय खोज के बाद पता चला कि वह लड़की चेन्नई में देखी गई है। इसके बाद एक उड़ीसा निवासी महिला के मार्गदर्शन में गाँव के चार लोग उसे खोजने चेन्नई रवाना हुए।
चेन्नई रेलवे स्टेशन पर बिछड़ा समूह
चेन्नई पहुँचने के बाद चारों ग्रामीण रेलवे स्टेशन पर आपाधापी में अलग-अलग दिशाओं में बिछड़ गए। खोज के दौरान लड़की मिल गई और उसके साथ गए तीन ग्रामीण भी वापस लौट आए, लेकिन
55 वर्षीय आदिवासी महिला घसनीन बाई नेताम अब तक लापता है।
आखिरी बार चेन्नई स्टेशन पर हुई थी देखी गई
परिजनों के अनुसार
- घसनीन बाई को अंतिम बार चेन्नई रेलवे स्टेशन पर देखा गया।
- स्थानीय और रेलवे पुलिस से संपर्क किया गया।
- सामाजिक संगठनों की मदद भी ली गई।
फिर भी तीन साल बाद भी कोई सुराग नहीं।
परिजनों की गुहार मामले की उच्चस्तरीय जांच हो
घसनीन बाई के परिजन राज्य सरकार, जिला प्रशासन और पुलिस से मांग कर रहे हैं
- CCTV फुटेज दोबारा खंगाला जाए।
- इंटर-स्टेट जांच को और मजबूत किया जाए।
- शक के आधार पर मानव तस्करी की दिशा में भी जांच हो।
गंभीर सवालों से घिरा मामला
यह मामला कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े करता है
🔸 क्या तीन साल में उसकी तलाश में लापरवाही हुई?
🔸 क्या यह इंटर-स्टेट तस्करी या किसी गिरोह से जुड़ा मामला हो सकता है?
🔸 क्या पुलिस को नए सिरे से जांच शुरू करनी चाहिए?
यह घटना ग्रामीण सुरक्षा, खोज तंत्र की कमजोरियां और मानव तस्करी की आशंका जैसे मुद्दों को फिर से सुर्खियों में ला रही है।








