
पितेश्वर हरपाल गरियाबंद । जिले के मैनपुर ब्लॉक के कांडसर माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ एकल शिक्षक सुमन प्रधान की बीती रात अचानक मौत हो गई। उनकी मौत ने पूरे शिक्षा समुदाय को झकझोर दिया है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि हालिया एक्सीडेंट में सिर की चोट इसके पीछे प्रमुख कारण हो सकती है। वहीं, बीएलओ और SIR कार्य का अतिरिक्त दबाव भी फिर से चर्चा का विषय बन गया है।
200 बच्चों की पूरी जिम्मेदारी, एकल शिक्षक थे सुमन प्रधान
कांडसर माध्यमिक विद्यालय में लगभग 150–200 बच्चे पढ़ते हैं और सुमन प्रधान अकेले शिक्षक के रूप में सभी अकादमिक गतिविधियों को संभाल रहे थे।
इसके साथ ही—
- शासन द्वारा गुणवत्ता शिक्षा का दबाव
- SIR कार्य
इन सभी ने उनका कार्यभार कई गुना बढ़ा दिया था।
जानकारी के अनुसार सुमन प्रधान SIR कार्य का केवल 2% ही पूरा कर पाए थे, जबकि क्षेत्र के अन्य बीएलओ 20–30% तक कार्य कर चुके थे।
कुछ दिन पहले हुआ था एक्सीडेंट, सिर में आई थी गंभीर चोट
कुछ दिनों पहले हुए सड़क हादसे में उनके सिर सहित कई हिस्सों में चोट आई थी।
परिजनों के अनुसार वे रायपुर जाकर C.T. स्कैन और आगे का इलाज करवाना चाहते थे, लेकिन इससे पहले ही बीती रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई।
उन्हें तत्काल देवभोग अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम में मिला संकेत—पुरानी रक्तस्राव की संभावना
देवभोग स्वास्थ्य केंद्र में सुबह पोस्टमार्टम किया गया।
प्रारंभिक निष्कर्षों में डॉक्टरों ने बताया—
- सिर के भीतर पुराना रक्त जमा हुआ था
- यह संभवतः एक्सीडेंट के बाद ब्रेन में ब्लीडिंग से संबंधित हो सकता है
- यही उनके अचानक निधन का कारण बना हो सकता है
अंतिम पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही होगी।
बीएलओ–SIR कार्य का दबाव फिर चर्चा में
पूरे जिले में दोबारा सवाल खड़ा हो रहा है—
क्या भारी प्रशासनिक कार्य भार ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति और खराब की?
यह इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि जगदलपुर और कोंडागांव में भी पिछले समय में बीएलओ/SIR कार्य के दबाव को शिक्षकों की मौत के साथ जोड़ा गया था।
बीएलओ बोले—दबाव तो है, लेकिन काम को रणनीति से करना चाहिए
हमारे संवाददाता ने कई बीएलओ से बात की। उन्होंने कहा
“हर काम में दबाव होता है, लेकिन रणनीति और शांत मन से काम किया जाए तो तनाव कम हो जाता है। हम ग्रुप में लगातार सलाह देते हैं कि अनावश्यक तनाव न लें।”
लेकिन जमीनी हकीकत अलग है—
- एकल शिक्षक
- 200 बच्चों की पढ़ाई
- रोज़ाना के सर्वे
- बढ़ता शैक्षणिक दबाव
- चुनाव व प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ
इन सबके बीच गुणवत्ता शिक्षा देना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
बच्चे स्कूल से लौट रहे थे बिना पढ़ाई के
सुमन प्रधान जब बीएलओ/SIR कार्य में व्यस्त रहते थे, तो बच्चे शिक्षक के अभाव में पढ़ाई के बिना लौट जाते थे।
यही बड़ा सवाल खड़ा करता है—
क्या एकल शिक्षक पर इतना अधिक बोझ डालना उचित है?
क्या शिक्षा इन दबावों के बीच गुणवत्तापूर्ण हो सकती है?
और क्या सुमन प्रधान की मौत में कार्य-दबाव ने भी भूमिका निभाई?
क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल
उनके निधन के बाद शिक्षक समुदाय गहरे सदमे में है।
परिजन भी यह समझ नहीं पा रहे हैं कि—
आखिर उनकी मौत एक्सीडेंट के कारण हुई या कार्य-तनाव ने स्थिति और खराब कर दी?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सभी सवालों का स्पष्ट जवाब मिल सकेगा।








