अंबिकापुर (सरगुजा)। सरगुजा जिले में जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) के संभावित संक्रमण ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर ला दिया है। सूअरों में इस वायरस की पुष्टि के बाद विभाग ने मंगलवार को इंसानों के भी 23 सैंपल जांच के लिए रायपुर भेजे हैं।
जानकारी के मुताबिक, सकालो सूअर फार्म में काम करने वाले कर्मचारियों और आस-पास के लोगों के सैंपल लिए गए। इससे पहले पशु चिकित्सा विभाग ने जिले के अंबिकापुर, लुंड्रा, बतौली, सीतापुर और मैनपाट क्षेत्रों से लिए गए 120 सूअरों के सैंपल में से 61 में जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस की पुष्टि की थी। जांच रिपोर्ट आईसीएआर-निवेदी, बेंगलुरु से आई है।
रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट जारी किया गया और एसओपी का पालन करते हुए सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। यह वायरस मच्छरों के काटने से फैलता है, इसलिए मलेरिया विभाग की टीम ने क्षेत्र में सर्वे और नियंत्रण कार्य शुरू कर दिया है।
वर्तमान में सरगुजा में इस बीमारी की जांच की सुविधा नहीं है, इसलिए सभी मानव सैंपल रायपुर एम्स भेजे जा रहे हैं।
क्या है जापानी इंसेफेलाइटिस (Japanese Encephalitis – JE)?
जापानी इंसेफेलाइटिस एक खतरनाक वायरल रोग है जो क्यूलेक्स प्रजाति के मच्छरों से फैलता है। यह वायरस प्रायः संक्रमित सूअर या जल पक्षियों से इंसानों में पहुंचता है।
मुख्य लक्षण:
तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, चक्कर, और गंभीर स्थिति में दौरे या कोमा तक।
अधिक खतरा: बच्चों और बुजुर्गों को।
रोकथाम उपाय:
जमा पानी की सफाई
मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग
जेई वैक्सीन लगवाना
भारत में स्थिति
उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में यह रोग पहले महामारी का रूप ले चुका है।
सरकार टीकाकरण और जागरूकता अभियानों के माध्यम से नियंत्रण की कोशिश कर रही है।
निष्कर्ष
सरगुजा में जेई वायरस की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है।
मच्छरों से बचाव, टीकाकरण और स्वच्छता ही इस बीमारी से बचने के सबसे प्रभावी उपाय हैं।








