केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने भ्रष्टाचार के आरोप में छत्तीसगढ़ के भिलाई और यूपी के बिजनौर में बुधवार को छापेमार कार्रवाई की। EPIL के तत्कालीन डीजीएम और एक निजी कंपनी के पार्टनर के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। अधिकारियों की टीम दोनों स्टेट में सरकारी और आवासीय परिसरों में दस्तावेज खंगाल रही है।
आरोप है कि, भिलाई स्टील प्लांट और मेसर्स इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स (इंडिया) लिमिटेड, (ईपीआईएल), (भारत सरकार का उद्यम) ने कच्चे माल की बढोतरी के लिए 30 अप्रैल 9:24 PM 2010 को एक अनुबंध किया था। जिसमें जालसाजी और भ्रष्टाचार के माध्यम से सरकार को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया है।
550 करोड़ का भ्रष्टाचार
कच्चे माल और हैंडलिंग सुविधाओं के विस्तार की स्थापना के लिए 5,50,82,27,000 रुपये का अनुबंध किया गया था। इस परियोजना के तहत ईपीआईएल ने कई सिविल निर्माण कार्यों के लिए निविदाएं जारी की थी।
आरोप है कि एक निजी कंपनी के साझेदार ने दस्तावेजों और चालानों में जालसाजी कर 84,05,880 रुपये का अनुचित लाभ प्राप्त किया। जिससे ईपीआईएल को भारी नुकसान हुआ।
जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल
आरोप है कि आरोपी पार्टनर ने फर्जी गेट मैटीरियल एंट्री चालान (फॉर्म सीआईएसएफ-157) और स्टोर इशू स्लिप के जरिए गलत बिलिंग की। जिसका सत्यापन ईपीआईएल के तत्कालीन उप महाप्रबंधक ने किया था।
इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रीइनफोर्सिंग स्टील की सप्लाई और इंस्टॉलेशन की दर 70 हजार रुपये प्रति टन तय की गई। जिसके जरिए आरोपी ने अवैध तरीके से आर्थिक लाभ उठाया।
सीबीआई की जांच में भविष्य में कुछ और अधिकारियों की संलिप्तता उजागर हो सकती है। फिलहाल छापेमारी के दौरान मिले साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। जिससे जांच में और भी अहम खुलासे होने की उम्मीद है। इस मामले में सीबीआई की कार्रवाई भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और सरकारी ठेकों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से की गई है।








