बालोद से अंकित टाटिया की रिपोर्ट
बालोद जिले के डौंडी ब्लॉक के चिखली गांव में जल जीवन मिशन के तहत बन रही पानी टंकी अब गांव वालों के लिए खतरे का कारण बन चुकी है। करीब एक साल पहले शुरू हुआ यह निर्माण कार्य अब अधूरा पड़ा है, और टंकी के निचले स्लैब को थामे हुए लकड़ी के सपोर्ट (सेंटरिंग) गिरने के कगार पर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि यह टंकी जनवरी 2024 में बनाई जानी शुरू हुई थी। लगभग चार महीने तक निर्माण कार्य चलता रहा और टंकी का निचला ढांचा तैयार भी हो गया, लेकिन उसके बाद ठेकेदार ने अचानक काम बंद कर दिया। तब से लेकर अब तक टंकी का काम अधूरा पड़ा है और ढांचा उसी स्थिति में खड़ा है।
चिखली गांव के पास हर सप्ताह हाट-बाजार लगता है और निर्माण स्थल के ठीक पास एक प्राथमिक विद्यालय भी स्थित है। गांव के बच्चे स्कूल आते-जाते हैं और आसपास खेलते भी हैं। इसके अलावा पशु भी उसी क्षेत्र में घूमते रहते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने बताया कि टंकी के नीचे लगी लकड़ियाँ अब सड़ चुकी हैं, रस्सियाँ कमजोर हो गई हैं और लोहे के सरिए खुले पड़े हैं। यदि सेंटरिंग गिरती है, तो यह आसपास मौजूद किसी भी व्यक्ति या पशु के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
ग्रामीणों ने बालोद जिले के कलेक्टर को इस समस्या से अवगत कराया है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। “हमने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई,” एक ग्रामीण ने बताया। “अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो हम सामूहिक रूप से आंदोलन करेंगे।”
इस मामले में जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन विभाग—पीएचई विभाग डौंडी—के सहायक अभियंता नितिन ठाकुर ने बताया कि 80 किलोलीटर क्षमता वाली पानी टंकी का निर्माण कार्य फिर से शुरू कराने के लिए ठेकेदार को नोटिस जारी किया गया है। “यदि ठेकेदार ने जल्द काम शुरू नहीं किया, तो अंतिम नोटिस दिया जाएगा और आगे की कार्रवाई की जाएगी,” ठाकुर ने कहा।
जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन चिखली गांव जैसे कई इलाकों में अधूरे पड़े निर्माण कार्यों के कारण यह योजना अटक गई है।
गांव के लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द कार्रवाई करेगा, ताकि अधूरी टंकी पूरी हो सके और ग्रामीणों को नियमित जलापूर्ति मिल सके। साथ ही, निर्माण स्थल पर आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए जाएं ताकि किसी अप्रिय घटना को टाला जा सके।








