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बस्तर दशहरा में शामिल होने 12 परगनों के देवी-देवता जगदलपुर रवाना

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कोण्डागांव में पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ दी गई विदाई, श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह

ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोण्डागांव। कोण्डागांव,बस्तर के ऐतिहासिक दशहरा पर्व में शामिल होने के लिए कोण्डागांव जिले के 12 परगनों से आए ग्राम देवी-देवताओं को पारंपरिक रीति-रिवाजों और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ जगदलपुर के लिए रवाना किया गया। मंगलवार को स्थानीय चौपाटी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन की ओर से ग्राम देवी-देवताओं, मांझी-चालकी, गायता, पटेल-पुजारियों और सैकड़ों श्रद्धालुओं को पारंपरिक तरीके से विदाई दी। इस दौरान सभी की सुखद एवं मंगलमय यात्रा की कामना की गई।

पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दी गई विदाई

कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद कोण्डागांव के अध्यक्ष श्री नरपति पटेल, राज्य तीरंदाजी संघ के उपाध्यक्ष श्री दीपेश अरोरा, श्री मनोज जैन और जिला पंचायत सदस्य श्री नंदलाल राठौर सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। जनप्रतिनिधियों ने बस्तर दशहरा में शामिल होने जा रहे सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं के आवागमन और पर्व में सहभागिता के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के संवाहक हैं ग्राम देवी-देवता

जनप्रतिनिधियों ने कहा कि बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक रीति-रिवाजों को संरक्षित रखने में ग्राम देवी-देवताओं, मांझी-चालकी, गायता, पटेल-पुजारियों और श्रद्धालुओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। सदियों से चली आ रही परंपराएं बस्तर की विशिष्ट पहचान को बनाए रखने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और विरासत से जोड़ती हैं।

आदिवासी संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है बस्तर दशहरा

बस्तर दशहरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की विशिष्ट आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है। इस ऐतिहासिक पर्व में विभिन्न परगनों के ग्राम देवी-देवताओं की सहभागिता और पारंपरिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व है। यह पर्व बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने के साथ लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ता है।

श्रद्धालुओं में दिखा विशेष उत्साह

बस्तर दशहरा में शामिल होने के लिए जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे ग्राम देवी-देवताओं और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक पूजा-अर्चना के बाद सभी जगदलपुर के लिए रवाना हुए।

इस अवसर पर आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त श्री कृपेन्द्र तिवारी, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री उत्तम महोबिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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