ब्यूरो अंकित टाटिया छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में आदिवासी भूमि को हड़पने का संगठित खेल बड़े पैमाने पर सामने आया है। डौंडीलोहारा क्षेत्र के खसरा नंबर 125 और 147 की जमीन पर “समता कॉलोनी” नाम से अवैध कॉलोनी बसाने का मामला उजागर हुआ है।
फर्जी रजिस्ट्री और अतिरिक्त रकबा बेचने का बड़ा घोटाला
जांच रिपोर्ट बताती है कि:
- खसरा नंबर 125 का वास्तविक रकबा 0.78 हेक्टेयर, लेकिन 0.88 हेक्टेयर बेचा गया।
- खसरा नंबर 147 का रकबा 1.14 हेक्टेयर, लेकिन 1.2334 हेक्टेयर बेचा गया।
यानी करीब 0.10 हेक्टेयर सरकारी एवं आदिवासी जमीन फर्जी कागजों से बेच दी गई।
आरोपियों में शामिल अनंतराम मदन, महेंद्र कुमार अजय, कमलेश जैन और झाड़ूराम ने अपनी जमीन से अधिक रकबा बेचकर धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
गंभीर धाराओं के तहत मामला, फिर भी कार्रवाई नहीं
यह फर्जीवाड़ा IPC की धारा 420, 467, 468, 447, 34 तथा SC/ST एक्ट के तहत गंभीर अपराध है।
राजस्व निरीक्षक व पटवारी ने जांच कर तहसीलदार को संयुक्त प्रतिवेदन सौंप दिया, जिसमें अवैध प्लाटिंग और फर्जी रजिस्ट्री की पुष्टि की गई।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि
- न एफआईआर दर्ज हुई
- न बुलडोजर चला
- न किसी की गिरफ्तारी हुई
स्थानीयों के आरोप: अधिकारियों की मिलीभगत
ग्रामीणों का आरोप है कि
एसडीएम शिवनाथ बघेल, तहसीलदार दीपक चंद्राकर, नगर पंचायत के CMO और राजस्व विभाग के कर्मचारी भूमाफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं।
लोग पूछ रहे हैं
सबूत मौजूद हैं, जांच रिपोर्ट स्पष्ट है, तो कार्रवाई अभी तक क्यों रुकी है?
क्या बड़े पैमाने पर पैसे का लेन-देन हुआ है?
आदिवासी संगठनों का अल्टीमेटम
आदिवासी समुदाय में भारी आक्रोश है।
उन्होंने कहा है कि
- अवैध समता कॉलोनी को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए
- सभी आरोपियों की गिरफ्तारी हो
- और संरक्षण देने वालों पर भी कार्रवाई की जाए
अन्यथा जिलेभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
सुशासन पर बड़ा सवाल
लोग सवाल उठा रहे हैं
“आदिवासी हितैषी कहे जाने वाले राज्य में उनकी जमीन पर खुलेआम लूट हो रही है और अधिकारी मूकदर्शक बने हैं
क्या यही सुशासन है?”
यह मामला सिर्फ जमीन कब्जे का नहीं, बल्कि आदिवासी अधिकारों और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल बनकर उभर रहा है।








