ब्यूरो नूतन साहू गरियाबंद ! ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुंचाने हेतु प्रत्येक मोहल्ले में स्वास्थ्य कर्मी चयन किया जाता है जिसे छत्तीसगढ़ में मितानिन कहते हैं जिनका काम दूरस्थ इलाकों में मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराना होता है
जिसका चैन गांव में मोहल्ला बैठक के माध्यम से होता है पर कुछ जगह प्रशासनिक कर्मचारी की मिली भगत से बिना मोहल्ला बैठक के नियुक्ति कर दी जाती है ऐसा ही वाक्या गरियाबंद के नजदीक ग्राम आमदी में देखा गया जहां ग्राम के युवकों को सूचना के अधिकार के माध्यम से पता चला कि उसके मोहल्ले में मोहल्ला बैठक हुआ ही नहीं फिर भी मितानिन की नियुक्ति हो गया इसके बाद ग्रामीण सचिव को ज्ञापन देकर में मितानिन भर्ती की मांग कर रहे हैं ग्रामीणों का कहना है कि हमारे मोहल्ले में पूर्व में मितानिन भर्ती हुई थी
जिसकी मोहल्ले बैठक की जानकारी हमें है ही नहीं वर्तमान में जो मितानिन है वह कम पढ़ी लिखी है जिस वजह से हम दवाइयां और स्वास्थ्य सामग्री लेने के लिए घबराते हैं तथा उप सरपंच के अध्यक्षता में सुनियोजित एवं पारदर्शी तरीके से दोबारा मोहल्ला बैठक कर कर शिक्षित मितानिन की भर्ती की जाये जिस किसी को कोई आपत्ति ना हो








