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सिद्ध खोल जलप्रपात मे युवा पर्यटक लगा रहे सौ फिट ऊपर से छलांग विभाग की लापरवाही से कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

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बलौदा बाजार से जितेंद्र पांडे की रिपोर्ट

सुरक्षा के नाम पर वसूली, नशे में झूमते युवा, टूटी बैरिकेडिंग और मूकदर्शक अधिकारी

बलौदा बाजार कसडोल ! प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर और हजारों पर्यटकों को आकर्षित करने वाला सिद्ध खोल जलप्रपात अब पर्यटन स्थल नहीं, जानलेवा  बनता जा रहा है। वन मंडल बलौदाबाजार के वन परिक्षेत्र सोनाखान  अंतर्गत स्थित यह जलप्रपात प्रतिदिन हजारों लोगों के आकर्षण का केंद्र है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है।



सुरक्षा के नाम पर केवल वसूली, ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी ‘नाका’ पर पैसा वसूलते नजर आते हैं

वन विभाग ने सुरक्षा के नाम पर कर्मचारियों को तैनात तो किया है, लेकिन ये कर्मचारी जलप्रपात की निगरानी करने के बजाय “सीता खोल” क्षेत्र में नाका लगाकर हर वाहन से वसूली में जुटे हैं।

मोटरसाइकिल पर आने वालों से ₹20

चारपहिया वाहनों से ₹30 की रसीद काटकर धन वसूली की जा रही है।
समझ से परे है कि इतनी सारी रसीद काट  कर जो पैसे लिए जा रहे है उन पैसो का आखीर वन विभाग करता क्या है यहा सिद्धखोल मे तो कोई भी विकाश कार्य दिखता भी नही झरने के पास लगे बेरिकेट भी कई साल  से टूटे हुए है जिसका आज दिनांक तक मरम्मद तक नही कराया गया है जबकी नका लगा कर रसीद काटने का काम कई वर्षो से चला आ रहा है


वहीं, जलप्रपात के ऊपर युवक शराब के नशे में डीजे पर झूमते हुए, ऊंचाई से छलांग लगाते हुए और बेकाबू हालत में नहाते नजर आते हैं, जिससे कभी भी किसी बड़े हादसे होने की आशंका लगातार बनी हुई है।

वन विभाग की ‘बेकार बैरिकेडिंग’ और ‘कागजी नोटिस’ की उड़ रही धज्जियां

हालांकि विभाग की ओर से जलप्रपात क्षेत्र में बैरिकेडिंग और चेतावनी हेतु नोटिस बोर्ड लगाए गए थे, परंतु:

बैरिकेडिंग कई जगह से टूटी हुई है, जिससे पर्यटक सीधे खतरनाक हिस्सों तक पहुंच रहे हैं।

नोटिस बोर्ड मात्र औपचारिकता बनकर रह गए हैं, उनका कोई पालन नहीं किया जा रहा है।

युवक इन्हीं टूटी बैरिकेडिंग से होकर छलांग लगा रहे हैं, जिससे यह साफ है कि वन विभाग के निर्देशों की खुलेआम अवहेलना हो रही है।जलप्रपात के आसपास एक भी कर्मचारी नही रहते है जो इस तरह के मनचले युवाओ को रोक भी अके आखिरकार नका बेरियर के पास ये वन कर्मचारी इतनी मात्र मे खाली बैठ कर किस तरह  कि ड्यूटी कर रहे है इन्हे जलप्रपात और झरने के आसपास क्यो नही भेजा जाता है,जबकी अभी जल का बहाव और झरना भी अपनी चरमसीमा पर है,जहा नका मे दो कर्मचारियों कि ड्यूटी पर्याप्त है,परन्तु नका मे चार से पांच  लोग हमेशा बैठे दीखते है


प्रशासन से कड़े एक्शन की मांग

यह बात और चौकाने वाली है कि सिद्ध खोल से महज ही 10 किमी के भीतर

उपवन मंडलाधिकारी (S.D.O) कार्यालय है,

और वन परिक्षेत्र अधिकारी का कार्यालय भी है,
फिर भी कोई निगरानी, गश्त या सुरक्षा उपाय जमीनी हकीकत में नजर नहीं आता।


यह सवाल प्रशासन से सीधे पूछे जाने चाहिए:

1. क्या अधिकारियों ने कभी खुद इस स्थल का दौरा किया है?और कभी  अपने किसी कर्मचारी को झरने के आसपास भी ड्यूटी करते देखे गये है क्या?


2. क्या तैनात कर्मचारियों की ड्यूटी पर निगरानी होती है?


3. क्या वसूली के अलावा उनका कोई वास्तविक कार्य निर्धारित है?



जनहित में कड़ी कार्रवाई की मांग

यदि विभाग सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता, तो उन्हें वसूली का भी कोई अधिकार नहीं है।
वन विभाग के इन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण अगर एक भी कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तो यह प्रशाशन की जवाब देही मानी जानी चाहिए।

मांग की जाती है कि:

जलप्रपात क्षेत्र में सुरक्षा टीम की नियमित तैनाती हो।

नशे, डीजे और असामाजिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जाए।

जो कर्मचारी सुरक्षा ड्यूटी छोड़कर वसूली में लगे हैं, उन्हें तत्काल निलंबित/बर्खास्त किया जाए।

टूटी हुई बैरिकेडिंग को तुरंत ठीक की जाए और नोटिस बोर्डों का पालन कराया जाए।

संपूर्ण स्थल को नियंत्रित पर्यटन क्षेत्र घोषित कर विभागीय निगरानी को अनिवार्य किया जाए।



इस रिपोर्ट को जनहित में जारी किया जा रहा है ताकि युवाओं की जान जोखिम में डालने से पहले प्रशासन जागे और अपनी जिम्मेदारियों का पालन करे।

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