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वृक्षारोपण सिर्फ शुरुआत है, संरक्षण तक निभाएं जिम्मेदारी – कलेक्टर बी.एस. उईके

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गरियाबंद से नूतन साहू की रिपोर्ट


मैनपुर के जिडार गांव में आयोजित हुआ विकासखंड स्तरीय वृक्षारोपण महा-अभियान, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने लिया उत्साहपूर्वक भाग

गरियाबंद ! पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल करते हुए विकासखंड मैनपुर के ग्राम जिडार में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन उत्सव जैसे माहौल में हुआ। कार्यक्रम की अगुवाई कलेक्टर श्री बी.एस. उईके ने की, जिनके साथ जिला पंचायत सीईओ श्री जी.आर. मरकाम, एसडीएम श्री तुलसीदास मरकाम और कई जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

कार्यक्रम में सैकड़ों ग्रामीणों, युवाओं, मितानिन बहनों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों ने एकजुट होकर पौधारोपण किया और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी ली।

‘एक पेड़ मां के नाम’ – एक भावनात्मक जुड़ाव

कलेक्टर श्री उईके ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधा लगाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने कहा,

> “पौधा लगाना केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वायु, हरियाली और जीवन देने की दिशा में हमारा नैतिक उत्तरदायित्व है।”



उन्होंने यह भी कहा कि वृक्षारोपण तभी सफल होगा जब हम उनके पेड़ बनने तक संरक्षण करें। फलदार पौधों के महत्व पर भी उन्होंने प्रकाश डाला।

30 एकड़ में फैला हरियाली का संकल्प

सीईओ श्री जी.आर. मरकाम ने बताया कि करीब 30 एकड़ भूमि में वृक्षारोपण किया गया है, जिसकी देखरेख की जिम्मेदारी स्व-सहायता समूहों को सौंपी गई है। प्रत्येक समूह एक-एक एकड़ भूमि की जिम्मेदारी निभाएगा, जो पर्यावरणीय सहभागिता का शानदार उदाहरण है।

जनप्रतिनिधियों ने दिया प्रकृति-संरक्षण का संदेश

जिला पंचायत सदस्य श्रीमती लोकेश्वरी नेताम ने कहा कि “हमारे क्षेत्र के लोग शुरू से जल, जंगल और जमीन के प्रति सजग रहे हैं, यही हमारी हरियाली की असली वजह है।”

संजय नेताम ने मैनपुर को जिले का सबसे हराभरा क्षेत्र बताते हुए जंगलों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की।

जनपद अध्यक्ष मोहना नेताम ने कहा कि “जंगल है तो जीवन है।” उन्होंने वृक्ष कटाव से हो रहे जलवायु असंतुलन पर चिंता जताई।


विशिष्ट सहभागिता

कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ सरपंच, जनपद सदस्य, पंचायत प्रतिनिधि, वन विभाग, कृषि, पीएचई, पंचायत और अन्य विभागों के अधिकारीगण, वरिष्ठ नागरिक एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन यशवंत बघेल ने प्रभावशाली रूप से किया।



निष्कर्ष

यह वृक्षारोपण महाअभियान केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता और सामूहिक उत्तरदायित्व का प्रतीक बन गया है। जब प्रशासन, जनप्रतिनिधि और आमजन मिलकर हरियाली की अलख जगाते हैं, तब विकास और प्रकृति दोनों का संतुलन संभव है।

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