भारत के सम्पूर्ण ड्राइवरों में इस कानून के खिलाफ भारी रोष और आक्रोस है। पिछले 77 सालों से भारतीय ड्राइवर को इंसाफ नहीं मिला और एक नया कानून थोपकर ड्राइवरों की जिंदगियां छीनने का महा पाप घोर अन्याय किया जा रहा है। पहले से भारतीय ड्राइवर पीड़ित दुखी लाचार शोषित और असहाय है। किसी भी सरकार किसी भी राजनीतिक दल पार्टी, किसी भी समूह,किसी भी एनजीओ संस्था ने आज तक उसका हाथ नहीं थामा। ऑल ड्राइवर कल्याण संघ के द्वारा प्रमुख मांगे ड्राइवर आयोग ,राष्ट्रीय ड्राइवर सम्मान दिवस, ड्राइवर राहत कोष, समेत 29 सूत्रीय मांगों पर अभी तक सरकार ने कोई इंसाफ नहीं दिया। अभी तक सरकार ने ड्राइवर की जिंदगी पर कोई मंथन नहीं किया रोशनी नही डाली। ड्राइवर किस हाल में रहते हैं, किस हाल में जीते हैं ड्राइवर का भविष्य कैसा है। उनकी परिस्थितियां कैसी है इसका चिंतन किसी ने नहीं किया। हादसों और एक्सीडेंट के जिम्मेदार ड्राइवर नहीं। सरकार और प्रशासन की गलत नीतियां है। ट्रैफिक रूल्स भारत में दुरुस्त नहीं है ट्रैफिक रूल्स की नीतियां गलत है। 1) बिना ट्रेनिंग के आम जन को लाइसेंस जारी करना। 2) प्रशासन द्वारा ट्रैफिक रूल का पालन आम जन को नहीं करवाना। 3) नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे में गांव और शहरों से जुड़ने वाली सड़कों के लिए ओवर ब्रिज या अंडरपास या ब्रैकेटिंग कर सड़क से जोड़ना रोड की मारकिंग सही तरीके से नहीं करना। 4) नाबालिगों एवं बालिगों द्वारा ओवर स्पीड गाड़ी चलाना स्टंट करना। 5) नई गाड़ियां खरीद कर सड़कों पर खुद सीखना और अपनी गलती से गाड़ियों की चपेट में आकर हादसों का शिकार होना। ड्राइवर को दोषी करार देना। 6) अवैध वसूली के लिए गाड़ियों का पीछा करना और गाड़ी के आगे आकर एक बैक ब्रेक मारना और हादसे का शिकार हो जाना। 7) छोटी सी गलती पर चलती गाड़ी में भारतीय ड्राइवर पर हमला करना और हादसे का खुद से शिकार होना या ड्राइवर को हादसे का शिकार बना देना। 8) सड़क निर्माण के ठेकेदारों के द्वारा निर्माणाधीन पुल पुलिया में ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करना जहां तहां सड़क किनारे या बीच में गड्ढे बनाकर छोड़ देना मारकिंग सही तरीके से नही करना। 9) ट्रैफिक पुलिस द्वारा अवैध वसूली और चालान काटने के दौरान लापरवाही करना बीच रास्ते में ही गाडियां अवैध तरीके से रोक कर। हादसों को जन्म देना 10) पुलिस डीटीओ ,आरटीओ,चंदा करने वालों के द्वारा बीच रोड में अचानक खड़े होकर गाड़ी रुकवाना अवैध तरीके से। 11) घाटियों में पहाड़ी क्षेत्रों में ब्रेक फेल गाड़ियों और अनबैलेंस होती गाड़ियों को कंट्रोल करने के लिए यंत्र का नहीं होना। 12) आवारा पशुओं का सड़कों पर रहना और अचानक रोड पर आ जाना। 13) सड़क किनारे बसने वाली आबादी के लिए सुरक्षा नियम ना बनाना। 14) सड़कों पर अतिक्रमण कर हाट बाजार दुकान लगाना। 15) सड़क किनारे दुकानदारों का अवैध कब्जा करना। 16) ट्रांसपोर्टर मालिकों व्यापारियों द्वारा टाइम बौण्डं करके जबरजस्ती ड्राइवर से गाड़ियों को चलवाना। टाइम पर नहीं पहुंचने पर ड्राइवर का पैसा काट लेना कारण डिप्रेशन। 17) लंबी दूरी की गाड़ियों पर डबल ड्राइवर और हेल्पर खलासी को गाड़ी मालिकों ट्रांसपोर्टरों द्वारा सुविधा ना देना। 18) ड्राइवर को कम सैलरी कम मजदूरी देना घर का गुजर बसर ना होने पर डिप्रेशन में रहना और हादसों का कारण बनना। 19) 6 महीने से लेकर साल-साल भर की सैलरी मांगने पर ड्राइवर को डीजल चोर और गाड़ी का माल चोर बताकर पैसे ना देना ड्राइवर का डिप्रेशन में रहना हादसों का कारण। 20) होटल और ढाबों में डीजल चोरी बैटरी चोरी के डर से ना रुकना निद्रा और नींद में रहना हादसे का कारण बनना। 21) चलती गाड़ी में लुटेरों से बच कर जान बचाकर भागने के क्रम में हादसे होना। 22) गाड़ी मालिकों ट्रांसपोर्टरों व्यापारियों आम जनो सरकारों सामाजिक सेवा संस्थाओं यहां तक की अपने रिश्तेदारों के द्वारा ड्राइवर को हीन भावना से देखे जाना, दुत्कारे जाने और मान-सम्मान न मिलने से ड्राइवर का डिप्रेशन में रहना हादसों का कारण इसके इलावा भी और भी अनेकों कारण है। दोषी कौन सरकार की नीतियां या प्रशासन की लापरवाही सिर्फ कानून बनाने से एक्सीडेंट नहीं रुकेंगे। जो पहले से कानून बने हैं। वह ड्राइवर के लिए पर्याप्त है। पुराने कानूनों को ईमानदारी से लागू करवाने में प्रशासन और सरकार विफल है। वह सरकार राज्य की हो या केंद्र की देश की पुलिस डीटीओ आरटीओ ट्रैफिक व्यवस्था के कर्मचारी और अधिकारी सरकारी अधिकारी सभी अवैध वसूली में व्यस्त हैं। अगर यह लोग इमानदारी से काम करें अपनी ड्यूटी करें तो एक्सीडेंट और सड़क हादसों में कमी आ सकती है या खत्म हो सकते हैं। यह कानून लाने से भारतीय ड्राइवर को इंसाफ नहीं मिलेगा। लोग अपनी खुद की गलतियों से हादसों का शिकार होते हैं। ड्राइवर चाहता है उसकी जान बच जाए वह मदद करना चाहता है। लेकिन पब्लिक ह़ हल्ला करती है और ड्राइवर जान बचाकर भाग जाता है। अगर वह रुकता है तो पब्लिक उसे पीट- पीट के मार डालेगी एवं ऐसी अनेकों घटनाएं इस तरह की भारतीय ड्राइवरों के साथ हो चुकी है। और वह अपनी जान बचाकर भागता है तो सरकार का बनाया कानून उसको 10 साल की सजा देकर उसके घर परिवार को आत्महत्या करने के लिए मजबूर करता है। 5000 से 10000 की सैलरी पाने वाला ड्राइवर एक एक्सीडेंट में 5 लाख रुपए का दण्ड कहां से जुटा पाएगा। ज्यादातर ड्राइवर किराए के घरों में रहते हैं। उनका अपना कुछ भी नहीं है। झुग्ग झोपड़ी में रहने वाले जिनके अपने घर हैं अगर उनको बेचकर जो जुर्माना वसूल किया गया तो उनके बाल बच्चे रोड पर आ जाएंगे और आत्महत्या करने को मजबूर होंगे। यह कानून आने से क्या भारतीय ड्राइवर को देश में गाड़ी चलाना अपराध हो जाएगा। माली हालत लाचार और खराब परीस्थिति में होने पर सरकार से कोई मदद ना पाने वाला ड्राइवर क्या अब भारत में अपराधी मान लिया जाएगा। अगर ऐसा है तो ऐसी मानसिकता वाली सरकार की ऑल ड्राइवर कल्याण संघ का परिवार घोर निंदा करता है। और सरकार को सलाह देता है कि भारत के 22 करोड़ चालकों का जीवन उनके सपने उनके मौलिक अधिकारों को छीनने वाला और जीवन नष्ट करने वाला उनके घर परिवार को नर्क बनाने वाला यह कानून सरकार वापस ले । गंभीरता से सोच कर पहले के कानूनों को ईमानदारी और सुचारू रूप से लागू करवाए। भ्रष्टाचार रिश्वत और घूसखोर में लिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई करें। गलत नियम और नीतियों में संशोधन करें और भारत के सम्पूर्ण ड्राइवर के साथ इंसाफ करें। भारतीय ड्राइवरों का पक्ष रखने के लिए एक ड्राइवर प्रतिनिधि लोकसभा और विधानसभा में नियुक्त करें। जिससे भारतीय ड्राइवरों को न्याय और इंसाफ मिलेगा। भारत सरकार ने जल्दबाजी में या आवेश भावना में आकर अपनी उपलब्धियां गिनवाने के लिए भारतीय ड्राइवर के साथ नाइंसाफी ना करें। अन्यथा भारत के 22 करोड़ चालकों का जन सैलाब सड़कों पर उतरेगा। सरकार को गंभीरता से सोच विचार कर पुनः विचार करना चाहिए। भारत सरकार को ये भी सूचना दी जा रही है की अगर इस फांसीवादी कानून को सरकार वापिस नहीं लेती है। तो आने वाले समय में कभी भी किसी भी समय भारत का सम्पूर्ण ड्राइवर चक्का जाम करेगा। महोदय भारत का सबसे पिछड़ा हुआ ड्राइवर डिपार्टमेंट है। इस पे कोई ध्यान नही देतासरकार के द्वारा लोकसभा सत्र में नया कानून 2023 लाया गया। जिसमें भारतीय ड्राइवर के द्वारा एक्सीडेंट होने पर 10 साल की सजा घायल व्यक्ति को छोड़कर भाग जाने पर। यदि ड्राइवर रुक कर अस्पताल पहुंचाए तो सजा कम हो सकती है और 5 लाख का जुर्माना। यह सरकार द्वारा अनुचित तरीके से भारत के 22 करोड़ चालकों के गले में फांसी का फंदा पहनाने के समान है।
नये कानून एक्सीडेंट होने पर ड्राइवर को 10 साल की होने वाली सजा और 5 लाख के दंड ड्राइवर कम्युनिटी कर रही इसका जमकर विरोध




