दल्लीराजहरा से अंकित टाटिया की रिपोर्ट…
कुसुमकसा की शांत सुबह अचानक हलचल में बदल गई, जब खुद कांकेर लोकसभा के माननीय सांसद भोजराज नाग जी स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम स्कूल में ताबड़तोड़ निरीक्षण के लिए प्रकट हो गए। और वो भी बिना “आई एम कमिंग” का व्हाट्सएप स्टेटस डाले!
स्कूल का अहाता निर्माण – जो पिछले जन्म में शुरू हुआ था और इस जन्म में भी पूरा नहीं हुआ – उसी का जायजा लेने सांसद महोदय पहुंचे। उन्हें देखकर स्कूल भवन ने भी शर्म से अपना प्लास्टर गिरा दिया!
योगेंद्र सिन्हा जी, जो भाजपा मंडल अध्यक्ष हैं और “कुसुमकसा के सचिन तेंदुलकर” माने जाते हैं (क्योंकि हर मुद्दे पर स्ट्रेट ड्राइव लगाते हैं), तुरंत रिपोर्टिंग मोड में आ गए। बोले – “सांसद महोदय, यह अहाता नहीं, अधूरा सपना है। इसका निर्माण कार्य सालों से बंद पड़ा है। स्कूल खुला है, मगर बाउंड्री नहीं है – जानवर और आवारा तत्व दोनों ही अंदर तक आ जाते हैं।”
(इस पर पीछे से कोई छात्र बोला – “सर, कल तो एक बकरी हमारी क्लास में बैठ गई थी!”)
रात के वक्त स्कूल ऐसा लगता है जैसे Netflix का ‘क्राइम थ्रिलर सेट’ हो। कोई गार्ड नहीं, कोई बाउंड्री नहीं – और लोग बोलते हैं, “बच्चे सुरक्षित हैं।”
इतना ही नहीं, स्वामी आत्मानंद योजना के नाम पर लगभग 50 लाख रुपये से स्कूल की मरम्मत करवाई गई। लेकिन मरम्मत देखकर दीवार भी रो पड़ी – “इतने में तो मुझे नया बना सकते थे!” आरोप है कि इस फंड में घोटाले का गरमागरम समोसा तलकर परोसा गया है।
योगेंद्र जी ने सांसद को “भ्रष्टाचार विशेष थाली” परोसी और बोले – “सर, इसकी जांच जरूरी है। नहीं तो कल को हम स्कूल के बच्चों को हेलमेट पहनाकर क्लास में बैठाना पड़ेगा।”
इस पर सांसद भोजराज नाग जी, जिनका गुस्सा धीरे-धीरे ‘Pressure Cooker Mode’ में आ गया था, बोले – “विकास में लापरवाही? ये मैं नहीं सहूंगा। जो भी जिम्मेदार हैं, उन्हें पकड़ा जाएगा, और संभवतः उनके घर की बाउंड्री भी तुड़वा दी जाएगी!”
कार्यक्रम के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष तोरण साहू, ‘हमेशा गंभीर रहने वाले’ कृष्णकांत साहू, ‘मौसम के अनुसार मूड बदलने वाले’ मनीष जेठवानी, और ‘स्थानीय समस्या विशेषज्ञ’ नितिन जैन भी मौजूद रहे, और सभी ने सिर हिलाकर सहमति में ‘ठोस भावनाएं’ प्रकट कीं।
निष्कर्ष:
सांसद जी चले गए, गुस्से में बोले गए, और अब उम्मीद की जा रही है कि या तो अहाता बनेगा या फिर स्कूल को ‘ओपन ज़ू’ घोषित कर दिया जाएगा।








