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डी ए वी जांता में ‘वीर बाल दिवस’ ‘साहिबजादों की शहादत कार्यक्रम ऑनलाइन जुड़ मनाया गया ।

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डी ए वी जांता के विद्यार्थियों ने प्रधानमंत्रीजी के कार्यक्रम वीर बाल दिवस में स्मार्ट बोर्ड के माध्यम से जुड़ें*दाढ़ी। भारत सरकार ने 26 दिसंबर को “वीर बाल दिवस” के रूप में मनाने का निर्णय लिए थे जिसके तहत आज डी ए वी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल जांता में ऑनलाइन स्मार्ट बोर्ड के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कार्यक्रम वीर बाल दिवस मनाया गया। इसे राष्ट्रीय वीर बाल दिवस भी घोषित कुए हैं. इस दिन देशभर के शिक्षण संस्थानों में वीर बाल दिवस के रूप में मनाया गया जिसमें हमारे विद्यालय में सुबह 10 बजे से 12:30 तक विद्यालय के लगभग 50 से ऊपर विद्यार्थियों ने आज भाग लेकर वीर बाल दिवस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों की वीरता और बलिदान की जानकारी दी गयी,सी बी एस ई दिल्ली व भुनेश्वर से फोन व मेल के माध्यम से जानकारी दिया गया था कि देश की प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा उक्त कार्यक्रम को संबोधित करेंगे जिसमे डी ए वी एम पी एस जांता का चयन किए हैं थे इसमें आज यहाँ बच्चों को कार्यक्रम में भाग लिए।संस्था के प्राचार्य पी एल जायसवाल ने बताया कि 9 जनवरी 2022 को सिख समुदाय के गुरू गोविन्द सिंह के प्रकाश पर्व के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि 26 दिसंबर को दसवें सिख गुरू गोविन्द सिंह के पुत्रों साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत की स्मृति में “वीर बाल दिवस के रूप में मनाने हेतू घोषणा किए थे. “वीर बाल दिवस” मनाए जाने का प्रमुख उद्देश्य साहिबजादा बाबा जोरावर सिंह जी एवं साहिबजादा फतेह सिंह जी की शहादत की याद करना एवं उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करना है इसका उद्देश्य था।.प्रधानमंत्री जी अपने उद्बोधन में बताया कि गुरु गोबिंद सिंह के सुपुत्रो को9 दिसंबर, 1705 को वजीर खान के सामने पेश होने के लिए बुलाया गया। दादी को अपने पोते-पोतियों से अलग होना दुखद लगा, लेकिन जोरावर सिंह ने उन्हें अपरिहार्य का सामना करने के लिए प्रोत्साहित किया। दरबार में युवा लड़कों ने साहसपूर्वक वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फ़तेह’ कहकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। एक मंत्री, सुच्चा नंद ने उन्हें उनके परिवार के भाग्य के बारे में बताया और जीवित रहने के लिए धर्म बदलने की सलाह दी।जोरावर सिंह की दृढ प्रतिक्रिया ने दिखाया कि उनके पालन-पोषण में केवल भगवान और गुरु के सामने झुकना सिखाया गया है। धर्म परिवर्तन को अस्वीकार करते हुए, उन्हें वज़ीर खान के क्रोध का सामना करना पड़ा। अडिग, भाइयों ने जोर देकर कहा कि वे न तो धन चाहते हैं और न ही पद, वे अपनी जान गंवाने को तैयार हैं लेकिन अपना धर्म नहीं। वजीर खान ने उन्हें जेल की कोठरी में बंद करने का आदेश दिया, बाद में उन्हें जिंदा दीवार में चुनवा दिया। दोनों ने अपनी जान दे दी लेकिन अपने धर्म पर अटल रहे। टोडर मल, एक धनी व्यापारी, गुरु गोबिंद सिंह के बच्चों की रिहाई के लिए फिरौती देने के लिए बहुत देर से पहुंचे। उन्होंने माता गुजरी को दुखद समाचार सुनाया, जो उन पीड़ादायक दिनों के दौरान चिंता से ग्रस्त होकर बेहोश हो गई, जिससे वह कभी उबर नहीं पाई। टोडर मल ने साहिबजादों और माता गुजरी के दाह संस्कार के लिए सोने के सिक्कों के बदले जमीन खरीदी। मानव इतिहास में ‘साहिबजादों’ की शहादत का कोई सानी नहीं है। दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों की ऐसी अभूतपूर्व शहादत को श्रद्धांजलि देने के लिए, 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस “रूप में मनाया जाता है। गुरु गोबिंद सिंह के युवा पुत्रों का बलिदान उनके अटूट विश्वास और साहस का एक मार्मिक और नैतिक रूप से उत्थानकारी प्रमाण है। इस उपलक्ष्य में विद्यालय के एक्टिविटी इंचार्ज श्री ललित देवांगन, संगीत शिक्षक राजा तन्तुवेय, संस्कृत शिक्षिका सुमित्रा पटेल,एवं अमित पटेल, अखिलेश पटेल,राहुल पटेल आदि सभी आज के कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग प्रदान किए।

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