थाना: खुर्सीपार !जैसे ही दिनांक 17 जून 2025 की रात ढली और पूरा खुर्सीपार चैन की नींद में था, कुछ युवक जो ज़िंदगी में “गैंगस्टर” बनने का सपना पाले बैठे थे, उन्होंने तय किया कि आज कुछ बड़ा करेंगे।
अब बड़ा क्या?
किसी बैंक को लूटना? नहीं!
गहनों की दुकान? भूल जाओ!
सीधा टारगेट बनाया – एक बुज़ुर्ग इंसान और उसके जेब में पड़े मात्र 300 रुपए!
जी हां, यह “महालूट कांड” हुआ खुर्सीपार की अंग्रेजी शराब दुकान के पास, जहाँ तीन जवान लड़कों ने मिलकर एक 58 वर्षीय बुज़ुर्ग विनोद कुमार को लूट लिया। अब सोचिए, तीन जवान, फुल एनर्जी में, चाकू लेकर – और शिकार कौन? एक बुज़ुर्ग जिनकी उम्र ऐसी थी कि वो लूटने वालों को आशीर्वाद दे देते, अगर इन्होंने विनम्रता से मांगा होता!
घटना का सिनेमाई विवरण:
स्थान: अंग्रेजी शराब दुकान के पास
समय: रात का वो वक्त जब लोग या तो पीकर सो जाते हैं या पीकर फालतू घूमते हैं
अपराध: चाकू दिखाकर ₹300 की ‘ग्रैंड डकैती’
जैसे ही विनोद जी वहां से गुज़रे, सामने आ गए तीन ‘भविष्य के चम्बल के डाकू’ –
1. शेखर गुप्ता (20)
2. मज्जी कुमार (19)
3. आफताब अंसारी (19)
तीनों ने सोचा – “अबे ये तो तगड़ा माल लग रहा है… सीधा रिटायरमेंट फंड लेकर घूम रहा है शायद!”
और फिर चाकू निकाला, डराया, धमकाया और लूट लिए पूरे 300 रुपये!
इतने में तो आजकल मोबाइल का कवर भी नहीं आता!
आरोपी
लेकिन पुलिस आई ‘हीरो मोड’ में –
थाना प्रभारी निरीक्षक वंदिता पनिकर और उनकी टीम ने केस को गंभीरता से लिया (वैसे लेना भी चाहिए था, 300 रुपये कोई मजाक नहीं)।
CCTV खंगाले गए, गली-गली पूछताछ हुई और फिर तीनों “लुटेरे” पकड़ लिए गए।
पूछताछ में तीनों आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल किया और कहा,
“हां मैडम, हमने ही लूटा था… भूख लगी थी!”
(इतने में समोसे भी पूरे नहीं आते, भाई!)

तीनों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड में जेल भेज दिया गया।
अब जेल में शायद इन्हें सिखाया जाएगा कि अपराध भी कोई Return on Investment होता है –
चाकू निकाला, बुज़ुर्ग को डराया, पुलिस से पकड़े गए, और जेल की रोटियां मिलेंगी ₹300 के बदले!
इतना तो Tiffin Centre में 3 दिन का खाना भी नहीं मिलता।
इस जबरदस्त (या कहें हास्यास्पद) कार्रवाई में योगदान देने वाले सुपरकॉप्स –
निरीक्षक वंदिता पनिकर
प्रआर आनंद तिवारी
आरक्षक चुमुक सिन्हा
आरक्षक शैलेश यादव
इनकी तेज़ी और तत्परता से न केवल अपराधी पकड़े गए, बल्कि पूरे मोहल्ले को यह संदेश मिल गया कि –
“अबे भाई, अगर 300 रुपये के लिए भी चाकू निकालोगे तो सीधे हवालात की हवा खाओगे!”
अंत में, एक विशेष अनुरोध इन नवोदित अपराधियों से –
भाई लोग! अगर पैसों की इतनी ज़रूरत थी तो कोई छोटा-मोटा काम कर लेते,
Swiggy, Zomato, Ola, Uber सब तो भिलाई में हैं,
या फिर सोशल मीडिया पर रोस्ट वीडियो ही बना लेते –
कम से कम किसी बुज़ुर्ग की “पेंशन लाइन” को निशाना तो नहीं बनाते!
खुर्सीपार में अब अपराधी भी बजट में आ गए हैं।
पहले चोरी लाखों की होती थी, अब “300 के चाकूबाज़” मैदान में हैं।
थाना खुर्सीपार की इस “मिनी मिशन” जैसी कार्रवाई ने साबित कर दिया – पुलिस की नजरें पैनी और आरोपी की किस्मत ढीली होती है।
समाप्त, मगर शर्म बाकी है!








