ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोंडागांव। कोंडागांव, ग्राम राजागांव की रहने वाली ममता बाछड़ आज आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल बन चुकी हैं। कभी आर्थिक तंगी से जूझ रहा उनका परिवार अब स्वरोजगार, मेहनत और शासन की योजनाओं के सहयोग से बेहतर जीवन की ओर आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत स्व-सहायता समूह से जुड़कर ममता ने अपने जीवन में बदलाव की नई शुरुआत की।
स्व-सहायता समूह से बदली जिंदगी
ममता माँ वैष्णवी स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बैंक से ऋण प्राप्त हुआ, जिसका उपयोग उन्होंने कपड़ों का व्यवसाय शुरू करने में किया। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन मेहनत और लगन से कारोबार लगातार आगे बढ़ा। आज उनकी कपड़ों की दुकान से सप्ताह में लगभग 10 से 15 हजार रुपये तक की आय हो जाती है।
बैंक ऋण बना स्वरोजगार का आधार
ममता बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पहले परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौतीपूर्ण था। ऐसे समय में समूह से जुड़ना और बैंक ऋण मिलना उनके लिए बड़ा अवसर साबित हुआ। उन्होंने ऋण का सदुपयोग करते हुए कपड़ों का कारोबार शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की।
परिवार के हर सदस्य की आजीविका में भागीदारी
ममता के परिवार के अन्य सदस्य भी अपनी-अपनी आजीविका से जुड़े हुए हैं। उनके पति मछली की दुकान चलाते हैं, जबकि बेटा भी मछली व्यवसाय करता है। उनकी बेटी पढ़ाई के साथ सिलाई का काम करती है और इससे होने वाली आय से अपनी पढ़ाई एवं व्यक्तिगत जरूरतों में सहयोग करती है। इस तरह परिवार के सभी सदस्य आर्थिक गतिविधियों में योगदान दे रहे हैं।
आर्थिक मजबूती से बढ़ा आत्मविश्वास
ममता के लिए सबसे बड़ी खुशी यह है कि आज उनका परिवार पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में है। स्वयं का व्यवसाय और परिवार के सदस्यों की अलग-अलग आय के साधनों ने आर्थिक परेशानियों को कम किया है। आर्थिक मजबूती के साथ परिवार में भविष्य को लेकर आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
लखपति दीदी योजना से मिला प्रोत्साहन
ममता अपनी सफलता का श्रेय लखपति दीदी पहल, स्व-सहायता समूह और शासन से मिले सहयोग को देती हैं। उनका कहना है कि समूह से उन्हें आर्थिक सहायता के साथ आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी मिला। बैंक ऋण की सुविधा ने उन्हें स्वरोजगार शुरू करने का अवसर दिया और आज वे अपनी मेहनत से अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।
ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। लखपति दीदी पहल के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को बेहतर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने, उनकी आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है। स्व-सहायता समूह महिलाओं को बचत, ऋण, स्वरोजगार और विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार भी महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दे रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
ममता की सफलता बनी प्रेरणा
ममता बाछड़ की कहानी इस बदलाव की प्रेरक तस्वीर है। उन्होंने स्व-सहायता समूह की ताकत और शासन की योजनाओं से मिले सहयोग को अवसर में बदला। बैंक से मिले ऋण का सदुपयोग कर कपड़ों का कारोबार शुरू किया और आज उनकी मेहनत रंग ला रही है। उनकी आय परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
ममता कहती हैं, “समूह से जुड़ने से मुझे काफी फायदा मिला। सरकार की मदद से बैंक से ऋण मिला और मैंने कपड़ों का कारोबार शुरू किया। आज मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से काफी अच्छी हो चुकी है। लखपति दीदी योजना से मुझे आगे बढ़ने का अवसर मिला।” उन्होंने महिलाओं के लिए सहयोग और सम्मान के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।








